ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत: पब्लिक हॉलिडे पर भारतीय प्रवासी के मजेदार तुलना ने इंटरनेट पर छेड़ी बहस

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नई दिल्ली: पिछले 10 सालों से ऑस्ट्रेलिया में बसे आदित्य खनेजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों की छुट्टियों के पीछे के ‘मकसद’ पर बात की। खनेजा का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां अक्सर मौज-मस्ती के लिए होती हैं, जबकि भारत में इनका आधार धार्मिक और सांस्कृतिक होता है।

वीडियो में खनेजा बताते हैं, “मुझे ऑस्ट्रेलिया में 10 साल हो गए हैं और मैंने एक बात समझ ली है—यहाँ के लोगों को मस्ती करने से बढ़कर कुछ नहीं सूझता।”

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अलग-अलग छुट्टियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ AFL ग्रैंड फाइनल या मेलबर्न कप (हॉर्स रेसिंग) जैसे मौकों पर लोग सिर्फ एन्जॉय करने के लिए छुट्टी ले लेते हैं। उन्होंने क्वींसलैंड के रॉयल शो और डार्विन के पिकनिक डे का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ छुट्टियां अक्सर मेलों या मनोरंजन से जुड़ी होती हैं।

इसके विपरीत, भारत की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “भारत में छुट्टियां मुख्य रूप से धार्मिक या शुभ अवसरों पर मिलती हैं, जैसे दिवाली या स्वतंत्रता दिवस।”

वीडियो का सबसे मजेदार हिस्सा

वीडियो का सबसे मजेदार हिस्सा वीकेंड पर पड़ने वाली छुट्टियों को लेकर था। खनेजा ने चुटकी लेते हुए कहा, “भारत में अगर दिवाली शनिवार को पड़ जाए, तो लोगों को लगता है जैसे कोई बड़ी त्रासदी हो गई। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में अगर कोई छुट्टी शनिवार या रविवार को आती है, तो सरकार फौरन शुक्रवार या सोमवार को छुट्टी दे देती है। यह सिस्टम वाकई शानदार है।”

उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि लोग अक्सर Australians को ‘लेड-बैक’ कहते हैं, और छुट्टियों का यह तरीका ही उसका असली कारण है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “बाकी दुनिया इससे एक बात सीख सकती है—मस्ती कभी रुकनी नहीं चाहिए।”

इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को लेकर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहाँ कुछ लोग खनेजा की बात से सहमत दिखे, वहीं कुछ ने इस दावे को गलत बताया। एक यूजर ने लिखा, “आप गलत जानकारी फैला रहे हैं, भारत में ऑस्ट्रेलिया से कहीं ज्यादा छुट्टियां मिलती हैं और यहाँ की लाइफ भी काफी चिल है।” वहीं एक अन्य यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यू साउथ वेल्स (NSW) में इस तरह की छुट्टियां नहीं मिलतीं।

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