नई दिल्ली: जहां एक ओर नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के तांडव ने कई जिंदगियों को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है, वहीं दूसरी तरफ आपदा के इस कहर के बीच एक बेटी का अदम्य साहस और समर्पण भी देखने को मिला है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा पर माता-पिता के अचानक लापता हो जाने के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देख रही तन्वी ने 30 अगस्त को आयोजित नीट-पीजी (NEET PG) की परीक्षा दी। परीक्षा हॉल में बिताया गया हर एक क्षण उसके लिए किसी मानसिक अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, लेकिन अपने पिता की अंतिम इच्छा और मां के संस्कारों को याद करते हुए उसने इस मुश्किल परीक्षा को पूरा किया।
मां का दही-चीनी का रिवाज
तन्वी ने बेहद भावुक होकर याद किया कि हर बड़ी परीक्षा से पहले मां उसे प्यार से दही और चीनी खिलाकर आशीर्वाद देती थीं।
इस बार परीक्षा केंद्र जाने से पहले न तो मां का वह दुलार उसके साथ था और न ही पिता का “ऑल द बेस्ट” कहने वाला ढांढस। इस सूनेपन ने तन्वी को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था।
कंप्यूटर स्क्रीन पर पिता की याद
तन्वी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी इस दर्दभरी दास्तान को साझा करते हुए बताया कि 3 घंटे के परीक्षा काल में से करीब डेढ़ घंटा वह रोती ही रही। आंखों में आंसुओं का सैलाब होने के कारण स्क्रीन पर लिखे सवाल तक ठीक से दिखाई नहीं दे रहे थे। जब परीक्षा शुरू हुई तो कंप्यूटर पर एडमिट कार्ड की फोटो दिखाई दी।
वह तस्वीर तन्वी के पिता ने खुद अपने हाथों से खींची थी। पिता द्वारा ली गई उस फोटो को देखते ही तन्वी का दिल भारी हो गया, लेकिन उसी क्षण उसने खुद को संभाला और मन ही मन तय किया कि पिता के सपने को पूरा करने के लिए उसे यह पेपर हर हाल में देना है।
नेपाल बॉर्डर पर आखिरी लोकेशन
तन्वी के माता-पिता, वेंकटराम और अनघा अन्नामदेवरा, 67 तीर्थयात्रियों के एक दल के साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए थे। 26 अगस्त को रसुवा कस्टम्स और फ्रेंडशिप ब्रिज के पास से उनका आखिरी संपर्क हुआ था, जिसके बाद नेपाल में आई बाढ़ के कारण उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिवार लगातार सुरक्षा एजेंसियों और टूर ऑपरेटरों से संपर्क करने में जुटा हुआ है। तन्वी को पूरा भरोसा है कि उसकी प्रार्थनाएं रंग लाएंगी और उसके माता-पिता जल्द ही सुरक्षित वापस घर लौट आएंगे।











