नई दिल्ली: नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) के बाद चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियानों के बीच अब एक नया और गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है। उफनती नदियों और मलबे के बीच से अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश शवों की तत्काल पहचान न हो पाने के कारण उनका अंतिम संस्कार अटका हुआ है, जिससे भीषण गर्मी और नमी के कारण शव तेजी से सड़ने लगे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में उठती असहनीय दुर्गंध और सड़ते शवों के कारण संक्रामक महामारियां फैलने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने अब लावारिस और बिना पहचान वाले शवों का डीएनए (DNA) नमूना सुरक्षित रखकर उनका अंतिम संस्कार करने का बड़ा फैसला लिया है।
अस्पतालों में जगह कम पड़ी
अकेले चितवन जिले से ही अब तक 178 शव निकाले जा चुके हैं, जिनमें 74 पुरुष, 41 महिलाएं और 8 बच्चे शामिल हैं। चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल ने बताया कि जिले के अस्पतालों में बने शवगृहों में जगह पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
लगातार सड़ रहे इन शवों से इतनी तेज दुर्गंध आ रही है कि आस-पास के रिहायशी इलाकों में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर घातक बीमारियों का प्रकोप फैलने की पूरी आशंका है।
सरकारी दफ्तरों में रखे जा रहे शव
महामारी के इस भयानक खतरे से निपटने के लिए नेपाल का गृह मंत्रालय बेहद सतर्क मोड में आ गया है। गृह मंत्रालय की उप प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी ने बताया कि रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों से लगातार नए शव बरामद हो रहे हैं। सरकार इस बात पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर रही है कि क्या शवों का दाह-संस्कार स्थानीय स्तर पर ही कर दिया जाए या फिर पूरी प्रक्रिया को गति देने के लिए उन्हें राजधानी काठमांडू लाया जाए। जिला प्रशासन अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर लावारिस शवों का त्वरित निस्तारण करने में जुटा है ताकि कोई बड़ा स्वास्थ्य संकट न खड़ा हो।
500 से अधिक शव मिलने से महामारी का बढ़ा खतरा
नेपाल के महामारी विज्ञान और रोग नियंत्रण विभाग ने सीमित बुनियादी ढांचे के कारण स्थिति के और बेकाबू होने की चेतावनी दी है। विभाग के निदेशक डॉ. अनुज भट्टाचन ने स्पष्ट किया कि शवों की शिनाख्त होने तक उन्हें सुरक्षित कोल्ड स्टोरेज में रखना बेहद जरूरी होता है, लेकिन अचानक इतनी बड़ी संख्या में मिले शवों के आगे देश की मौजूदा रेफ्रिजरेशन क्षमता बौनी साबित हो रही है। इसी आपात स्थिति के हल के रूप में धाडिंग और अन्य आसपास के जिलों में मिले शवों को काठमांडू और पोखरा स्थानांतरित किया जा रहा है ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके और घनी आबादी वाले इलाकों को महामारी के प्रकोप से बचाया जा सके। उफनती नदियों और मलबे के बीच से अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।












