नई दिल्ली: बांग्लादेश के रंगपुर में एक ही हिंदू परिवार के चार सदस्यों की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और बार-बार बदलती जांच थ्योरी को लेकर भारी जन-आक्रोश पनप गया है। मामले में पुलिस द्वारा दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद दिए गए परस्पर विरोधी बयानों पर सवाल उठाते हुए ‘रंगपुर सिटी सिविक सोसाइटी’ ने अब इस पूरे हत्याकांड की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
बंद घर से मिले थे चार सड़े-गले शव
यह भयावह वारदात रंगपुर शहर के मछुआपारा (दासपारा) इलाके में सामने आई थी, जहां 22 अगस्त को एक बंद मकान से सेवानिवृत्त शिक्षक गनपति चक्रवर्ती (65), उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती (50), बेटी आगामी चक्रवर्ती प्रार्थी (23) और 12 वर्षीय बेटे प्रियम चक्रवर्ती के सड़े-गले शव बरामद किए गए थे।
इस सिलसिले में पुलिस ने मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास नाम के दो चचेरे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने नशे की हालत में छत पर पकड़े जाने के बाद पहचान छिपाने की नीयत से पूरे परिवार की बेरहमी से हत्या कर दी। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ‘आइन ओ शालिश केंद्र’ और ‘हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ ने शुरुआत में ही पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए थे।
बयान बदलने से पुलिस पर घटा जनता का भरोसा
रंगपुर सिटी सिविक सोसाइटी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा मीडिया को दी गई जानकारियों में भारी विरोधाभास है। इस अपारदर्शिता के कारण स्थानीय जनता का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठ चुका है, जिससे मामले को दबाने की आशंका बढ़ गई है।
नागरिक समाज ने पुलिस की दो अलग-अलग ब्रीफिंग का हवाला देते हुए बताया:
23 अगस्त की पहली ब्रीफिंग: पुलिस ने दावा किया था कि गनपति चक्रवर्ती की हत्या छत पर हुई, जबकि उनकी पत्नी और बेटी की हत्या दूसरी मंजिल की सीढ़ियों पर और बेटे का कत्ल कमरे के भीतर सोते समय किया गया था।
27 अगस्त की दूसरी ब्रीफिंग: पुलिस ने अपना बयान बदलते हुए कहा कि गनपति, उनकी पत्नी और बेटी तीनों की हत्या दिन के उजाले में खुली छत पर की गई थी, और बाद में शवों को घसीटकर सीढ़ियों तक लाया गया था।
पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग
वारदात की जगह और घटनाक्रम को लेकर पुलिस के बयानों में आए इस बड़े बदलाव ने जांच की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिक समाज और स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सच को सामने लाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच ही एकमात्र रास्ता है, ताकि इस नृशंस नरसंहार के पीछे के वास्तविक साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश हो सके।












