नई दिल्ली: राखी से जुड़ी प्राचीन परंपरा और परंपरा में इसकी शुरुआत की कहानी जानें. साथ ही, भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी प्रसिद्ध कथा और रक्षाबंधन के महत्व को स्वीकार करें. इस पवित्र अपवित्रता को आज भी क्यों मनाया जाता है, जानने के लिए पढ़ें पूरी जानकारी.
राखी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है? इसका इतिहास, महत्व और सिद्धांत जानें
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, विश्वास और सुरक्षा के वादे का प्रतीक है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है, जबकि भाई उसकी रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है.
धार्मिक मान्यताओं में कृष्ण और द्रौपदी की कथा को राखी से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि द्रौपदी ने कृष्ण की घायल उंगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था. इसके बाद कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया. इसलिए रक्षाबंधन को प्यार, सम्मान और सुरक्षा के पवित्र रिश्ते का त्योहार माना जाता है.
1. जब द्रौपदी ने कृष्ण को बांधा धागा, जानिए कैसे बना सुरक्षा का वादा
मान्यता है कि एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर खून निकलने लगा. द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया. द्रौपदी के इस प्रेम और अपनापन से प्रभावित होकर कृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया.
कहा जाता है कि कौरवों की सभा में जब द्रौपदी का अपमान हुआ, तब कृष्ण ने उनकी लाज बचाई. यह कथा राखी को प्यार, विश्वास और सुरक्षा के पवित्र बंधन का प्रतीक बताती है.
2. राजा बलि और देवी लक्ष्मी की कथा, राखी में छिपा प्यार और वचन का संदेश
मान्यता है कि राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु पाताल लोक में उनके द्वारपाल बन गए थे. भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए देवी लक्ष्मी ने एक साधारण महिला का रूप धारण किया और राजा बलि की कलाई पर पवित्र धागा बांधा.
जब बलि को देवी लक्ष्मी की असली पहचान पता चली, तो उन्होंने अपने वचन का सम्मान करते हुए भगवान विष्णु को उनके साथ जाने दिया. यह कथा राखी को प्यार, विश्वास, सुरक्षा और वचन निभाने का प्रतीक बताती है.
3. गणेश जी की बहन कैसे बनीं संतोषी माता? जानें रक्षा मंत्रालय से जुड़ी कहानियां
मान्यता है कि रक्षाबंधन के दिन गणेश जी की बहन मनसा देवी ने उन्हें राखी बांधी. यह देखकर उनके पुत्र शुभ और लाभ उदास हो गए, क्योंकि उनकी कोई बहन नहीं थी.
बेटों को खुश करने के लिए गणेश जी ने दिव्य शक्तियों से एक पुत्री की रचना की, जिन्हें संतोषी माता कहा गया. इसके बाद शुभ और लाभ ने भी अपनी बहन के साथ रक्षाबंधन मनाया. यह कथा भाई-बहन के प्रेम, अपनापन और भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है.
4. सिकंदर और राजा पुरु की कहानी: राख के टुकड़ों ने बदल दिया युद्ध का रुख
मान्यता है कि 326 ईसा पूर्व सिकंदर के भारत पर आक्रमण के दौरान उसकी पत्नी रोक्साना ने राजा पुरु को राखी भेजकर सिकंदर की रक्षा का अनुरोध किया था.
कहा जाता है कि युद्ध के दौरान जब पुरु को सिकंदर पर हमला करने का मौका मिला, तो उन्होंने अपनी कलाई पर बंधी राखी का सम्मान करते हुए उसे नुकसान नहीं पहुंचाया. यह कथा राखी के सम्मान, विश्वास और वचन निभाने की भावना को दर्शाती है.
5. यमराज को यमुना ने बांधी राखी, जानें भाई की लंबी उम्र से जुड़ी कथा
मान्यता है कि लंबे समय बाद जब यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने पहुंचे, तो यमुना ने खुशी से उनका स्वागत किया. उन्होंने भाई के लिए भोजन बनाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी.
यमुना के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएगा, उसे लंबी उम्र, सुख और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलेगा. इसी मान्यता के चलते रक्षाबंधन पर बहनें भाई की खुशहाली और दीर्घायु की कामना करती हैं.
6. शची ने इंद्र की कलाई पर बाँधा रक्षा सूत्र, जानिए रक्षा सूत्र की प्राचीन कथा
मान्यता है कि देवताओं और राक्षसों के बीच हुए युद्ध में देवताओं को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था. इससे देवताओं के राजा इंद्र चिंतित थे. तब उनकी पत्नी शची ने एक पवित्र रक्षा सूत्र तैयार कर इंद्र की कलाई पर बांधा.
कहा जाता है कि इस रक्षा सूत्र से इंद्र को शक्ति और सुरक्षा मिली और उन्होंने युद्ध में विजय हासिल की. यह कथा बताती है कि प्राचीन समय में रक्षा सूत्र को सुरक्षा, शक्ति और सफलता का प्रतीक माना जाता था.
7. जब रानी कर्णावती ने हुमायूँ को रबर की दुकान पर बुलाया, तो यह अनोखी अनोखी कहानी थी
मान्यता है कि 16वीं शताब्दी में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान के हमले के समय मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी. राखी के इस रिश्ते से प्रभावित होकर हुमायूं ने उनकी मदद के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया.
हालांकि, वह समय पर चित्तौड़ नहीं पहुंच सके. बाद में उन्होंने कर्णावती के पुत्र को उसका राज्य वापस दिलाकर इस रिश्ते का सम्मान किया. यह कथा प्यार, विश्वास और भाईचारे से ऊपर उठकर रिश्ते निभाने का संदेश देती है.
रक्षाबंधन की ये प्राचीन कथाएं आज भी क्यों हैं खास? जानें इनके महत्व
रक्षाबंधन से जुड़ी ये सात कथाएं प्यार, विश्वास, त्याग, सुरक्षा और वचन निभाने का संदेश देती हैं. कृष्ण-द्रौपदी से लेकर कर्णावती-हुमायूं तक की कहानियां बताती हैं कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना ही रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है.
राखी का पवित्र धागा आज भी भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के वादे का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि समय बदलने के बावजूद रक्षाबंधन का महत्व और इसकी भावनाएं आज भी लोगों के बीच कायम हैं.












