नई दिल्ली: पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल (ATF) से जुड़ा एक बड़ा फैसला केंद्र सरकार ने लिया है. वित्त मंत्रालय ने इन तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव की घोषणा की है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भी वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार निर्यात नीति को संतुलित करना है.
नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं डीजल पर लगने वाली कुल एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी बड़ा इजाफा किया गया है. अब विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और अन्य शुल्क मिलाकर डीजल पर कुल 25.5 रुपये प्रति लीटर का टैक्स देना होगा, जबकि पहले यह 15.5 रुपये प्रति लीटर था. इसी तरह, विमानन ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क बढ़ाया गया है. पहले जहां इस पर 14.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगता था, अब इसे बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. नई दरें 3 अगस्त से लागू हो चुकी हैं.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
केंद्र सरकार का कहना है कि विंडफॉल टैक्स में बदलाव का मकसद घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तब कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ा सकती हैं. ऐसे में देश के भीतर ईंधन की कमी या कीमतों पर दबाव न पड़े, इसलिए सरकार समय-समय पर टैक्स में बदलाव करती है. सरकार का यह भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के बीच यह व्यवस्था घरेलू आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है और निर्यात से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ पर भी नियंत्रण रखती है.
क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?
विंडफॉल टैक्स बढ़ने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें भी बढ़ जाएंगी. फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है. यह टैक्स केवल उन कंपनियों पर लागू होता है, जो भारत से पेट्रोल, डीजल और ATF का निर्यात करती हैं. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी रिफाइनिंग कंपनियों को विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर यह अतिरिक्त शुल्क देना होगा. इसका सीधा असर घरेलू पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ता, क्योंकि यह टैक्स आयातित तेल या देश के भीतर बिकने वाले ईंधन पर लागू नहीं होता.
हर 15 दिन में होती है समीक्षा
विंडफॉल टैक्स की दरें स्थायी नहीं होतीं. केंद्र सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता की समीक्षा करती है. इसी आधार पर टैक्स में बढ़ोतरी या कटौती का फैसला लिया जाता है. पिछले महीने भी सरकार ने डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क बढ़ाया था, जबकि पेट्रोल पर कुछ राहत दी गई थी.
16 जुलाई की अधिसूचना में डीजल का शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर और ATF का शुल्क 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था. वहीं पेट्रोल पर शुल्क 4 रुपये से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था. अब ताजा संशोधन के बाद सरकार ने एक बार फिर वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों को देखते हुए टैक्स ढांचे में बदलाव किया है.












