नीरव मोदी को लेकर ब्रिटेन से सनसनीखेज दावा, भारत ने तथ्यों के साथ किया पलटवार

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UK India relations
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नई दिल्ली: ब्रिटेन की पूर्व गृह सचिव प्रीति पटेल ने एक नया दावा करते हुए भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण और अवैध प्रवासियों के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है. उनका कहना है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण में हो रही देरी की वजह से भारत ने ब्रिटेन से अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस लेने की प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया. हालांकि, भारतीय पक्ष ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भारत हमेशा से अवैध प्रवासन के खिलाफ रहा है और वह अपने नागरिकों को वापस लेने से कभी पीछे नहीं हटा.

प्रीति पटेल ने यह बयान ‘डायमंड किंग’ नाम के एक पॉडकास्ट में दिया है. यह चार एपिसोड की एक सीरीज है, जिसमें भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के उत्थान, घोटाले और उसके बाद की घटनाओं को दिखाया गया है. इस पॉडकास्ट को ब्रिटिश पत्रकार रॉब मेंडिक और मिक ब्राउन ने तैयार किया है. यही दोनों पत्रकार वर्ष 2019 में नीरव मोदी का लंदन में पता लगाने के बाद सुर्खियों में आए थे. पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान प्रीति पटेल ने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए जाने के कई साल बाद भी नीरव मोदी अब तक ब्रिटेन से भारत नहीं भेजा जा सका है.

प्रत्यर्पण में देरी पर जताई नाराजगी

पूर्व गृह सचिव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी. इसके बावजूद कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वह अब भी ब्रिटेन में है. उनके मुताबिक, इस स्थिति से भारत काफी नाराज है और इसका असर दोनों देशों के बीच अन्य मामलों में भी देखने को मिला. उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने ब्रिटेन में रहने वाले अवैध भारतीय नागरिकों को वापस भेजने की कोशिश की, तब उन्हें भारत से आवश्यक सहयोग हासिल करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा. उनका मानना है कि इसके पीछे नीरव मोदी का मामला एक बड़ी वजह रहा.

अवैध प्रवासियों को लेकर क्या कहा?

प्रीति पटेल ने कहा कि ब्रिटेन में अवैध रूप से रहने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या काफी अधिक है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने कई मामलों में उन लोगों की पहचान की पुष्टि करने में देरी की, जिन्हें वापस भेजा जाना था. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मौकों पर भारत ने ऐसे चार्टर विमानों को स्वीकार करने से भी इनकार किया, जिनमें अवैध प्रवासियों को भेजे जाने की योजना थी. उनके अनुसार, इस वजह से कई मामलों में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.

नीरव मोदी अब भी ब्रिटेन में

नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी है और भारत लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है. फिलहाल वह लंदन की पेंटनविले जेल में बंद है और भारत भेजे जाने के खिलाफ लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, उसने प्रत्यर्पण रोकने के लिए कानूनी प्रक्रिया पर £1 मिलियन से अधिक खर्च किए हैं. हाल ही में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि उसने यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में दायर अपनी याचिका में राहत नहीं पाई है. हालांकि, इस संबंध में अदालत और ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की. वहीं, नीरव मोदी के वकील ने कहा कि कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी.

भारत और ब्रिटेन के बीच समझौता

भारत और ब्रिटेन ने वर्ष 2021 में प्रवासन और लोगों की आवाजाही से जुड़ा एक समझौता किया था. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाना था. इसके बावजूद अवैध भारतीय प्रवासियों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. वर्ष 2018 में लगभग एक लाख अवैध भारतीयों का आंकड़ा सामने आया था, लेकिन उस समय भारत सरकार ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया था.

भारत ने दावे को बताया गलत

प्रीति पटेल के बयान के बाद भारतीय पक्ष ने उनके आरोपों को गलत बताया है. भाजपा के यूके और यूरोप प्रवासी मित्र संगठन के प्रभारी कुलदीप शेखावत ने कहा कि भारत ने कभी भी अवैध प्रवासियों को वापस लेने से इनकार नहीं किया है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के किसी भी देश में अवैध प्रवासन का समर्थन नहीं करता. उनके मुताबिक, यदि कोई भारतीय नागरिक अवैध रूप से विदेश में रह रहा है और उसकी पहचान की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो भारत उसे वापस लेने की नीति पर हमेशा कायम रहा है. ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले की वजह से भारत ने अवैध प्रवासियों को वापस लेने से मना किया.

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