सिक्किम में तबाही, भूस्खलन से 8 की मौत, टनल में फंसे 27 मजदूर

0
11
Sikkim Landslide
Sikkim Landslide

नई दिल्ली: सिक्किम के नामची जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए हादसे ने कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. मीथेन गैस के विस्फोट के बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन हो गया, जिससे कई मजदूर अंदर ही फंस गए. प्रशासन ने अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि की है, जबकि बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि सुरंग के भीतर मौजूद खतरनाक हालात राहत कार्य को लगातार मुश्किल बना रहे हैं.

यह हादसा नामची जिले में एनएचपीसी की तीस्ता चरण-VI जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ. अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस काफी मात्रा में जमा हो गई थी. जब गैस को बाहर निकालने की कोशिश की गई, तभी अचानक विस्फोट हो गया. विस्फोट के बाद सुरंग के अंदर भूस्खलन हुआ और प्रवेश मार्ग पूरी तरह बंद हो गया. इससे अंदर मौजूद मजदूरों के बाहर निकलने का रास्ता भी बंद हो गया.

25 मजदूर फंसे, सात की मौत की पुष्टि

हादसे के समय सुरंग के भीतर एनएचपीसी के कर्मचारियों समेत कुल 25 मजदूर काम कर रहे थे. जिला प्रशासन ने सात मजदूरों की मौत की पुष्टि की है. वहीं बाकी 18 मजदूर अब भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं. उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है.

हादसे के बाद से बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं. दूसरे दिन भी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर डटी रहीं. सभी एजेंसियां समन्वय के साथ सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन हालात सामान्य नहीं होने के कारण अभियान बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है.

गैस और ऑक्सीजन की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा सुरंग के अंदर मौजूद मीथेन गैस और ऑक्सीजन का कम स्तर है. इसके अलावा सुरंग के भीतर धूल, मलबा और कम दृश्यता के कारण राहत कर्मियों को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है. अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में गैस जमा हो गई थी. ऐसे माहौल में बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के काम करना संभव नहीं है.

कई बचावकर्मी भी हुए बीमार

शुरुआती दौर में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीम ने अंदर पहुंचने की कोशिश की, लेकिन जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बचावकर्मियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. स्थिति को देखते हुए शुरुआती बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा. बाद में एनडीआरएफ की टीमों ने भी अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन खतरनाक परिस्थितियों के कारण उन्हें भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी.

रेस्क्यू अभियान को तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल से गैस सुरक्षा उपकरणों से लैस एक विशेष बचाव दल को बुलाया गया है. इसके अलावा पाकयोंग और सिलीगुड़ी में तैनात एनडीआरएफ की दूसरी बटालियन के अतिरिक्त जवानों को भी मौके पर भेजा गया है, ताकि बचाव अभियान को और मजबूती मिल सके.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here