पाकिस्तान बना मेजबान, फिर भी जिनेवा में होंगे हस्ताक्षर… पर्दे के पीछे क्या है वजह?

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Pakistan is hosting US Iran deal
Pakistan is hosting US Iran deal

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही परमाणु वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच हुए अस्थायी समझौते को औपचारिक रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में हस्ताक्षर किए जाएंगे. समारोह में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है. ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान और अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शामिल होने की चर्चा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया है कि उनका देश इस कार्यक्रम का मेजबान होगा.

इस्लामाबाद के बजाय जिनेवा में क्यों हस्ताक्षर समारोह?
हालांकि, इस घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है कि जब पाकिस्तान मेजबानी कर रहा है तो समारोह का आयोजन इस्लामाबाद के बजाय जिनेवा में क्यों किया जा रहा है. दरअसल, समझौते से जुड़ी शुरुआती बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई थी और मई के अंत में एक और बैठक की तैयारी भी की गई थी, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेता वहां नहीं पहुंचे.

विश्लेषकों के अनुसार, जिनेवा को चुनने के पीछे कई कारण हैं. पहला कारण यह है कि ईरान चाहता था कि समझौते पर हस्ताक्षर उसी शहर में हों, जहां पहले दोनों देशों के बीच बातचीत प्रस्तावित की गई थी. युद्ध शुरू होने से पहले जिनेवा में वार्ता की योजना बनाई गई थी, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण वह बैठक नहीं हो सकी. ऐसे में ईरान इसे कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देख रहा है.

जिनेवा की ऐतिहासिक पहचान
दूसरा कारण जिनेवा की ऐतिहासिक पहचान है. यह शहर दशकों से अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं और महत्वपूर्ण समझौतों का केंद्र रहा है. कई बड़े वैश्विक समझौते यहीं संपन्न हुए हैं, जिसके चलते इसे विश्व कूटनीति और शांति का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

 पहलू सुरक्षा 
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा से जुड़ा है. यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समारोह में शामिल होते हैं, तो उनके लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि जिनेवा इस मामले में अधिक सुरक्षित और उपयुक्त विकल्प है.

समझौते के तहत ईरान और अमेरिका के बीच 14 बिंदुओं पर सहमति बनी है. इसके अनुसार अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा, जबकि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखेगा. साथ ही, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी. समझौते में आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल करने और वित्तीय सहायता देने जैसे प्रावधान भी शामिल बताए जा रहे हैं.

हालांकि, इस पूरे समझौते पर इजरायल ने असहमति जताई है. इजरायली नेतृत्व का कहना है कि उसकी सुरक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और उसके सैनिक दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे.

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