होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाज पर गोलीबारी, गुजरात के नाविक की मौत

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Strait of Hormuz
Strait of Hormuz

नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक और भारतीय जहाज गोलीबारी का शिकार हुआ है। शुक्रवार (08 मई 2026) को हुई इस घटना में गुजरात के एक नाविक की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। नाविकों के संगठन ने घटना की पुष्टि की है। शिपिंग निदेशालय ने भी हादसे की पुष्टि की है, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी। अधिकारियों ने बताया कि वे पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।

लकड़ी के जहाज पर हुआ हमला   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह भारतीय जहाज लकड़ी से बना था और इसका नाम अल फैज नूर-ए-सुलेमानी 1 था। जहाज पर 18 लोगों का क्रू सवार था। 7 मई 2026 को यह दुबई से यमन के मुक्कम के लिए निकला था।

वहीं 8 मई की रात करीब एक बजे होर्मुज स्ट्रेट पार करते वक्त जहाज दो पक्षों की गोलीबारी के बीच फंस गया। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद से होर्मुज लगातार टकराव का केंद्र बना हुआ है। ईरान ने बिना इजाजत किसी भी जहाज के निकलने पर रोक लगा रखी है। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

द्वारका के सलाया गांव का रहने वाला था मृतक   

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन (गुजरात) के महासचिव आदम भाया ने अधिकारियों को लिखी चिट्ठी में इसे अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच हुई दुर्भाग्यपूर्ण झड़प बताया। हादसे में जान गंवाने वाले नाविक का नाम अल्ताफ तालाब केर था।

वह जहाज पर इंजन ड्राइवर थे और गुजरात के द्वारका जिले के सलाया गांव के रहने वाले थे। बाकी क्रू को सुबह 7 बजे के करीब MSV प्रेम सागर-1 ने बचाया। सभी उसी दिन शाम 6 बजे दुबई पोर्ट पहुंच गए। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय दूतावास के अधिकारी बचाए गए लोगों से मिले हैं।

होर्मुज से निकले 11 भारतीय जहाज 

गौरतलब है कि गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 11 भारतीय जहाज होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं। अभी भी 13 जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। एक प्रेस ब्रीफिंग में उनसे पूछा गया कि क्या ईरानी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी से बचने के लिए पाकिस्तानी और फिर भारतीय समुद्री सीमा से गुजर सकते हैं। लेकिन क्या इसके लिए भारत से अनुमति लेनी होगी? 

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “यदि दूसरे देशों के जहाज अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलना चाहते हैं तो किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। लेकिन भारतीय जलक्षेत्र में आने का मामला तकनीकी है। इसका जवाब शिपिंग मंत्रालय या संबंधित अधिकारी ही देंगे।” 

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