ईरान की सत्ता पर सवाल! आखिर कहां और कैसी हालत में हैं मुज्तबा?

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ईरान की राजनीति इन दिनों एक बड़े बदलाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. 28 फरवरी 2026 को हुए एक हवाई हमले ने देश की सत्ता संरचना को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बताया जा रहा है कि उनके चेहरे पर गहरे जख्म आए हैं और पैरों में इतनी गंभीर चोट लगी कि उन्हें एक पैर गंवाना पड़ा. खुफिया सूत्रों का कहना है कि उनकी हालत को देखते हुए अब तक उनकी कोई तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे उनकी स्थिति को लेकर अटकलें और बढ़ गई हैं.

इलाज के बीच भी फैसले जारी

हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि शारीरिक चोटों के बावजूद मुज्तबा मानसिक रूप से सक्रिय हैं. वे ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. वे युद्ध से जुड़े फैसलों के साथ-साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता जैसे अहम मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं. ईरानी मीडिया उन्हें बहादुर बताते हुए उनकी स्थिति को सकारात्मक रूप में पेश कर रहा है.

सीमित अधिकार और बढ़ती चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि मुज्तबा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पकड़ मजबूत करना है. अपने पिता के मुकाबले उनके पास अभी वह मजबूत और स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है. यह भी माना जा रहा है कि उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की अहम भूमिका रही है. मौजूदा हालात में सैन्य नेतृत्व का प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया पर उनका दबदबा दिख रहा है.

कहां हैं मुज्तबा खामेनेई?

मुज्तबा की गैरमौजूदगी ने सोशल मीडिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इंटरनेट की सीमित उपलब्धता के बावजूद उनके बारे में कई तरह की चर्चाएं और मीम्स सामने आ रहे हैं. कुछ लोग पूछ रहे हैं कि वे कहां हैं, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उनका सार्वजनिक रूप से सामने न आना जरूरी है. उनका मानना है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के खतरे को देखते हुए यह कदम देश के हित में है.

शांति वार्ता के बीच बढ़ी चिंता

मुज्तबा की सेहत को लेकर आई खबरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता शुरू होने वाली है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक घायल और पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहा नेता इतने बड़े फैसले लेने में सक्षम होगा.

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