मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत, 45 हजार टन एलपीजी लेकर मुंद्रा पहुंच रहा भारतीय जहाज

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता के बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक एलपीजी कैरियर सुरक्षित रूप से खतरनाक समुद्री रास्ते को पार कर भारत की ओर बढ़ चुका है और कुछ ही घंटों में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने वाला है. इस जहाज के सुरक्षित पहुंचने से देश में एलपीजी आपूर्ति को लेकर बनी परेशानी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है.

जानकारी के अनुसार, शिवालिक एलपीजी कैरियर में 45 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी भरी हुई है. यह जहाज युद्ध से प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलकर भारत की ओर रवाना हुआ था. इस समुद्री मार्ग से गुजरना हाल के दिनों में बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था, क्योंकि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. इस जहाज के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है. सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो.

दूसरा भारतीय जहाज भी पहुंचने वाला

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कूटनीतिक प्रयासों के बाद दो भारतीय एलपीजी जहाजों को संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से निकलने की अनुमति मिली थी. इनमें से पहला जहाज ‘शिवालिक’ मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचने वाला है, जबकि दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है. इन दोनों जहाजों के पहुंचने से एलपीजी आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है.

कच्चे तेल से भरा एक और टैंकर भारत के लिए रवाना

इसी बीच एक और भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से करीब 80,800 टन कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है. इसके अलावा ‘जग प्रकाश’ नाम का एक अन्य भारतीय टैंकर भी पहले ही होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है. यह जहाज ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के टांगा बंदरगाह की ओर जा रहा है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है.

फारस की खाड़ी में अभी भी मौजूद हैं कई भारतीय जहाज

सरकार के अनुसार, फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं. सरकार इन जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है और स्थिति पर करीबी निगरानी बनाए हुए है.

ऊर्जा आपूर्ति पर तनाव का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है. भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. इससे पहले भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता रहा है. हालांकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जोखिम बढ़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है. इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने रूस सहित अन्य देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति को संतुलित करने की कोशिश की है.

औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर असर

ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा के चलते प्राकृतिक गैस की आपूर्ति औद्योगिक इकाइयों के लिए सीमित कर दी गई है. इसके साथ ही होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को मिलने वाली एलपीजी की मात्रा में भी कमी की गई है. फिलहाल सरकार का ध्यान समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने पर है. ऐसे में शिवालिक और नंदा देवी जैसे जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना देश के लिए राहत की खबर माना जा रहा है.

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