प्रयागराज की इस दुकान में महिलाओं की एंट्री पर रोक! आखिर क्या है वजह, मालिक ने बताई अपनी मजबूरी

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नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक किराना दुकानदार का अनोखा विरोध इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजापुर इलाके में रहने वाले दुकानदार घनश्याम बाबा ने अपनी दुकान के बाहर एक ऐसा बोर्ड लगा दिया है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। बोर्ड पर लिखा है, ‘इस दुकान पर औरतों का आना मना है’। इसके साथ ही उन्होंने भगवान से यह भी प्रार्थना लिखी है कि कम से कम ग्राहक भेजें। पहली नजर में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे दुकानदार की एक बड़ी परेशानी बताई जा रही है।

बोर्ड की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग इस मामले पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं कि आखिर दुकानदार ने अपनी दुकान पर ऐसा बोर्ड क्यों लगाया है। आखिर क्या है इस बोर्ड का पूरा सच, यही सभी जानना चाहते हैं। इसी बीच घनश्याम बाबा ने इसकी पूरी वजह बताई।

शराबियों के व्यवहार से परेशान होकर उठाया कदम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बताया कि शाम होते ही दुकान के आसपास कुछ लोग शराब पीकर जमा हो जाते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर फब्तियां कसने के साथ बदसलूकी करते हैं। रोजाना की इन घटनाओं से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया, ताकि महिलाओं को होने वाली परेशानी और आसपास के माहौल को लेकर लोगों का ध्यान खींचा जा सके। दुकानदार का मानना है कि महिलाओं के दुकान पर नहीं आने से वहां भीड़ और विवाद कम होंगे। हालांकि, इस फैसले का असर उनके कारोबार पर भी पड़ा और ग्राहकों की संख्या के साथ कमाई में भी गिरावट आई। इसके बावजूद उन्होंने यह कदम उठाया। उनका कहना है कि यह बोर्ड लगाने के पीछे मकसद प्रचार करना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर करना है।

सोशल मीडिया पर पुलिस-प्रशासन पर उठे सवाल

बोर्ड की तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग दुकानदार की मजबूरी समझते हुए उनके फैसले का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, कई यूजर्स का सवाल है कि गलत व्यवहार करने वाले शराबियों को सजा क्यों नहीं मिलती? लोगों का कहना है कि महिलाओं को दुकान पर आने से रोकना समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि महिलाएं बिना डर के सड़क और बाजार में आ-जा सकें। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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