नई दिल्ली: दीपावली का असली अर्थ केवल घरों को दीपों से सजाना और रोशनी से जगमगाना नहीं, बल्कि उन चेहरों तक खुशियों की चमक पहुंचाना भी है, जिनकी जिंदगी में खुशियों के पल अक्सर कम होते हैं। इसी मानवीय संवेदना और सेवा भावना की खूबसूरत मिसाल पेश करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के प्रतिनिधियों ने तारे ज़मीन फाउंडेशन पहुंचकर बच्चों के साथ दीपावली का पर्व मनाया।
115 बच्चों के साथ मनाई दीपावली
इस विशेष आयोजन में चिकित्सकों के साथ निवासी समुदाय के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन में रह रहे और उससे जुड़े कुल 115 बच्चों के बीच दीपावली की खुशियां बांटी गईं। इनमें 18 अनाथ बच्चे भी शामिल थे। बच्चों के लिए यह अवसर किसी यादगार उत्सव से कम नहीं रहा। उनके चेहरों पर खिलती मुस्कान और उत्साह ने पूरे आयोजन को भावनाओं से भर दिया।
मिठाई, नमकीन और दीयों का वितरण
इस दौरान बच्चों को जलपान, मिठाइयां, स्वादिष्ट नमकीन और दीपावली के पारंपरिक दीये वितरित किए गए। उपहार और मिठाइयां पाकर बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी। त्योहार की रौनक के बीच बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ इस खास पल का आनंद लिया। आयोजन का उद्देश्य केवल सामग्री का वितरण करना नहीं, बल्कि बच्चों को अपनापन, स्नेह और समाज के साथ जुड़ाव का एहसास कराना भी था।
चिकित्सकों ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
आरडीए एम्स के प्रतिनिधियों की इस पहल ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी केवल अस्पतालों और मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों के साथ खड़े होना भी सामाजिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी जा सकती है।
खुशियां बांटने का दिया संदेश
तारे ज़मीन फाउंडेशन में आयोजित यह दीपावली समारोह इस बात का प्रतीक बना कि खुशियां बांटने से कम नहीं होतीं, बल्कि कई गुना बढ़ जाती हैं। जहां एक ओर बच्चों को त्योहार की मिठास और रोशनी मिली, वहीं दूसरी ओर समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक प्रेरणादायक संदेश भी सामने आया।












