बलूचिस्तान में सेना की कार्रवाई से हाहाकार, 300 परिवारों को छोड़ना पड़ा पुश्तैनी घर

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना की कार्रवाई के चलते सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए हैं। क्वेटा में रहने वाले माशवानी जनजाति के परिवारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फायरिंग और सैन्य एक्शन के कारण करीब 300 परिवारों को अपना पुश्तैनी घर छोड़कर पलायन करना पड़ा है। इन लोगों को बेहद मुश्किल हालात में दिन गुजारने पड़ रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बारिश और ठंड के बीच विस्थापित लोगों को खाने और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। ये परिवार क्वेटा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित पंजपाई क्षेत्र के किली मोहम्मद खैल गांव से पलायन करने को मजबूर हुए हैं। सुरक्षाबलों की गोलाबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल से यहां घरों को नुकसान पहुंचा है। विस्थापित लोगों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। एक पीड़ित परिवार ने कहा कि उनके पास बच्चों के साथ जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। उन्हें ये भी नहीं पता कि वे अपने घर कब लौट पाएंगे।

झड़प के बाद खाली कराया इलाका

बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये परिवार भोजन, आश्रय और साफ पीने के पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। किली मोहम्मद खैल इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लोगों के बीच झड़प हुई थी। बताया गया कि इस दौरान फ्रंटियर कॉर्प्स का एक जवान मारा गया। एक अफगान शरणार्थी शिविर के पास भी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। इसके बाद इलाके को घेर लिया गया और वहां रहने वाले लोगों को स्थान खाली करने के लिए कहा गया।

पार्टी ने की निंदा

पख्तूनख्वा नेशनल अवामी पार्टी ने इस विस्थापन की निंदा की है। पार्टी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी लोगों को उनके घरों से बाहर निकालना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सुरक्षा के नाम पर लोगों को उनके घरों और पुश्तैनी इलाकों से बेदखल करना अन्याय है। पार्टी ने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों को भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएं और उनकी सुरक्षित तथा सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित की जाए। पार्टी का कहना है कि आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना राज्य की जिम्मेदारी है, लेकिन निर्दोष नागरिकों को सामूहिक सजा नहीं दी जानी चाहिए।

किसानों की भी यही शिकायत

क्वेटा में हुआ ये विस्थापन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्वादर जिले के शादी कौर इलाके के किसानों ने भी इसी तरह की शिकायतें उठाई हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वे अपने घरों और खेती की जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई परिवार पहले ही विस्थापित हो चुके हैं। जमीन मालिकों, किसानों और बटाईदारों को अपने बागों और तैयार फसलों तक पहुंचने से रोका जा रहा है। इससे करोड़ों रुपये की कृषि संपत्ति खतरे में पड़ गई है।

मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी ने भी आरोप लगाया है कि पूरे बलूचिस्तान में हजारों परिवारों को जबरन विस्थापित किया गया है और उनसे उनके पुश्तैनी घर, आजीविका और अपनी जमीन पर रहने का अधिकार छीन लिया गया है। संगठन के मुताबिक, कई इलाकों से लोगों को घर छोड़ना पड़ा है और कई और इलाकों को खाली करने के नोटिस दिए जा चुके हैं।

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