नई दिल्ली: साइबर अपराधियों ने अब ठगी का ऐसा नया तरीका अपना लिया है जिसमें किसी संस्था के वरिष्ठ अधिकारी का नाम और तस्वीर इस्तेमाल कर लाखों रुपये पर हाथ साफ किया जा रहा है। दिल्ली में इसी तरह के एक सनसनीखेज मामले में साइबर अपराधियों ने शैक्षणिक संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी की पहचान का दुरुपयोग कर कॉलेज के अकाउंटेंट को व्हाट्सऐप पर संदेश भेजा और तत्काल धनराशि स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। अधिकारी का नाम और तस्वीर देखकर अकाउंटेंट को संदेश पर भरोसा हो गया और उसने बिना दोबारा पुष्टि किए कॉलेज के बैंक खाते से सीधे 80 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए। हालांकि दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने तेजी दिखाते हुए महज दो दिन के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और ठगी की पूरी 80 लाख रुपये की रकम लाभार्थी बैंक खाते में रोक लगवाकर सुरक्षित करा ली।
आईएफएसओ डीसीपी गौरव त्यागी ने बताया कि 27 अक्टूबर को थाना स्पेशल सेल आईएफएसओ में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत ऋषि ऑरोबिंदो एजुकेशनल सोसाइटी के महासचिव अभिषेक जैन ने दर्ज कराई थी। यह संस्था नरेला स्थित चंद्र प्रभु जैन कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ का संचालन करती है।
व्हाट्सऐप पर बॉस की पहचान, अकाउंटेंट को दिया लाखों ट्रांसफर करने का आदेश
जांच में सामने आया कि साइबर ठग ने संस्थान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम और फोटो इस्तेमाल कर व्हाट्सऐप के माध्यम से कॉलेज के अकाउंटेंट से संपर्क किया। खुद को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश करते हुए उसने तत्काल 80 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। संदेश को असली समझकर अकाउंटेंट ने बिना संबंधित अधिकारी से फोन पर पुष्टि किए रकम इंडसइंड बैंक में एम/एस एन.एस. ट्रेडर्स के नाम से संचालित बैंक खाते में भेज दी।
गाजियाबाद तक पहुंची पुलिस की जांच, दो दिन में आरोपी दबोचा
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईएफएसओ की विशेष टीम ने तत्काल जांच शुरू की। पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन और धनराशि के हस्तांतरण से जुड़े तथ्यों का विश्लेषण करते हुए ठगी की रकम के लाभार्थी खाते का पता लगाया। जांच की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस गाजियाबाद के लोनी निवासी 33 वर्षीय नौशाद तक पहुंची, जो एम/एस एन.एस. ट्रेडर्स का मालिक बताया गया है। पुलिस टीम ने 29 अक्टूबर 2026 को उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस अपराध में अन्य लोगों की संलिप्तता के संबंध में जानकारी दी है। पुलिस उसके खुलासों और संदिग्ध सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
ठगी के पूरे 80 लाख रुपये सुरक्षित, पुलिस की बड़ी कामयाबी
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पुलिस ने लाभार्थी बैंक खाते में समय रहते रोक लगवाकर ठगी की पूरी 80 लाख रुपये की रकम सुरक्षित करा ली। इस तरह पीड़ित शैक्षणिक संस्थान की 100 प्रतिशत ठगी की रकम को सुरक्षित करने में सफलता मिली। इसके साथ ही मुख्य लाभार्थी खाते के धारक को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
बॉस इम्पर्सोनेशन फ्रॉड से रहें सावधान
पुलिस के मुताबिक इस तरह की साइबर ठगी में अपराधी किसी संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान, नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को भ्रमित करते हैं। कई मामलों में व्हाट्सऐप अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच बनाकर या फर्जी पहचान तैयार करके अकाउंटेंट और वित्तीय कर्मचारियों को जल्दबाजी में रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है। अधिकारी का नाम और फोटो देखकर कर्मचारी निर्देश को वास्तविक मान लेते हैं और लाखों रुपये गंवा बैठते हैं।
आईएफएसओ टीम की निगरानी में चला ऑपरेशन
यह पूरी कार्रवाई एसीपी आईएफएसओ मनोज कुमार मिश्रा की करीबी निगरानी तथा डीसीपी-I आईएफएसओ गौरव त्यागी के समग्र पर्यवेक्षण में अंजाम दी गई। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने तकनीकी जांच, बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई के जरिए इस साइबर ठगी का पर्दाफाश किया।
दिल्ली पुलिस की अपील
पुलिस ने संस्थानों कंपनियों और आम नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सऐप या अन्य डिजिटल माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर धनराशि ट्रांसफर करने का निर्देश मिलने पर जल्दबाजी न करें। किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले संबंधित अधिकारी से उसके आधिकारिक नंबर पर सीधे संपर्क कर पुष्टि अवश्य करें। अनजान बैंक खातों में रकम भेजने से बचें और साइबर ठगी का संदेह होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।फिलहाल मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश और उनकी भूमिका की जांच जारी है।












