नई दिल्ली: भाजपा ने एक्टर्स दीया मिर्जा और नसीरुद्दीन शाह पर पर्यावरण के मुद्दे पर ‘चुनिंदा गुस्सा’ दिखाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि दोनों सिर्फ हिंदू त्योहारों पर प्रदूषण की बात करते हैं, लेकिन दूसरे धर्मों के त्योहारों पर चुप रहते हैं। मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “ये सिलेक्टिव मैसेजिंग है। आप कहते हैं पर्यावरण का ध्यान रखो, लेकिन जब ईद और बकरीद पर बकरे काटे जाते हैं और पानी प्रदूषित होता है, तब नसीरुद्दीन शाह और दीया मिर्जा जैसे लोग एक शब्द नहीं बोलते। ये दोहरा मापदंड है।”
गौरव भाटिया ने क्या कहा?
भाटिया से बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर सवाल पूछा गया था जिसमें कोर्ट ने BMC के इको-फ्रेंडली दिवाली कैंपेन के लिए दीया मिर्जा का वीडियो हटाने पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि ये दुखद है और BMC को वीडियो दोबारा अपलोड करना चाहिए। इस पर भाटिया ने कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट का ऑर्डर नहीं देखा, इसलिए उस पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण और ध्वनि प्रदूषण की चिंता हमेशा होनी चाहिए, सिर्फ कुछ त्योहारों पर नहीं। “नागरिक हमेशा नागरिक रहता है। अगर पर्यावरण की चिंता है तो हमेशा होनी चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि आप हिंदू त्योहारों पर बयान दें और दूसरे धर्मों के त्योहारों पर चुप रहें। ऐसी चुनिंदा चिंता से लोगों की विश्वसनीयता खत्म होती है।”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, BMC ने दिवाली पर इको-फ्रेंडली और पटाखा-मुक्त कैंपेन के लिए दीया मिर्जा, माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे के वीडियो पोस्ट किए थे। सोमवार को मुंबई भाजपा प्रमुख अमित साटम ने दीया के वीडियो पर आपत्ति जताई और मेयर रितु तावड़े ने उन्हें ‘हिंदू-विरोधी’ कहा। इसके बाद BMC ने सिर्फ दीया का वीडियो हटा दिया, जबकि बाकी लोगों के वीडियो पेज पर रहे।
इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और नीला गोखले की बेंच ने कहा कि पर्यावरण जागरूकता के वीडियो को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। कोई ये सवाल नहीं कर सकता कि BMC ने किस सेलिब्रिटी को क्यों चुना। भाजपा ने नसीरुद्दीन शाह के हालिया वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने छात्र विरोध के समर्थन में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया था। पार्टी का कहना है कि ऐसे बयान भी इसी चुनिंदा सोच का हिस्सा हैं।












