Rohtang Maggi Stall: मैगी और चाय बेचकर रोहतांग का ये छोटा स्टॉल रोज कमा रहा इतने हजारों, कमाई जानकर उड़ जाएगे होश

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नई दिल्ली: पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में घूमने का मजा गरमा-गरम मैगी और चाय के बिना अधूरा माना जाता है। हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग पास जैसे पर्यटन स्थलों पर सड़क किनारे मिलने वाली मैगी पर्यटकों की पसंदीदा डिश है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन छोटे-छोटे स्टॉल पर होने वाली बिक्री कितनी बड़ी हो सकती है? इन दिनों रोहतांग पास के एक मैगी विक्रेता की कमाई का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

वीडियो में दुकानदार की रोजाना की बिक्री का आंकड़ा सुनकर लोग हैरान रह गए हैं। खास बात यह है कि जब पर्यटन का सीजन धीमा चल रहा है, तब भी स्टॉल पर अच्छी बिक्री हो रही है।

ऑफ-सीजन में भी मैगी और चाय की जबरदस्त डिमांड

कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान ने रोहतांग पास पर पहुंचकर एक स्थानीय दुकानदार से बातचीत की। शुरुआत में दुकानदार ने बताया कि फिलहाल ऑफ-सीजन होने के कारण पर्यटकों की संख्या कम है और कारोबार पहले की तुलना में धीमा चल रहा है।

हालांकि, जब बिक्री का पूरा हिसाब सामने आया तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। दुकानदार के मुताबिक, वह प्रतिदिन लगभग 60 से 70 प्लेट मैगी और करीब 200 कप चाय बेच लेता है। इसके अलावा अंडे और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री से भी कमाई होती है।

जानिए कैसे होती है रोजाना 14 से 15 हजार रुपये की बिक्री

दुकानदार की बताई गई बिक्री के आधार पर रोजाना की अनुमानित कमाई का गणित काफी दिलचस्प है।

मैगी की बिक्री: एक प्लेट मैगी की कीमत 100 रुपये है। रोजाना 60 से 70 प्लेट बेचने पर 6,000 से 7,000 रुपये की बिक्री होती है।
चाय की बिक्री: एक कप चाय 40 रुपये में मिलता है। प्रतिदिन 200 कप चाय बेचने से करीब 8,000 रुपये की बिक्री होती है।

इस तरह मैगी और चाय की बिक्री मिलाकर रोजाना लगभग 14,000 से 15,000 रुपये का कारोबार हो जाता है। अंडे और अन्य सामान की बिक्री इसमें शामिल नहीं है। हालांकि, यह रकम कुल बिक्री है, दुकानदार का शुद्ध मुनाफा नहीं। इसमें से खर्च घटाना जरूरी है।

कमाई के पीछे छिपा है पहाड़ों का कठिन संघर्ष

रोहतांग पास पर कारोबार करना सुनने में जितना आकर्षक लगता है, वास्तविकता में उतना ही चुनौतीपूर्ण है। यहां दुकानदार को रोजाना कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मनाली से रोहतांग तक सामान और गैस सिलेंडर पहुंचाने में करीब 2,000 रुपये का खर्च बताया गया है। इसके अलावा बेहद कम तापमान, तेज बर्फीली हवाएं और पानी की कमी जैसी समस्याएं भी काम को मुश्किल बनाती हैं। तेज हवा के कारण गैस की खपत बढ़ जाती है, जबकि पीने और खाना बनाने के लिए पानी दूर से लाना पड़ता है।

रोहतांग पास के इस मैगी स्टॉल की कहानी यह दिखाती है कि मेहनत और सही जगह पर कारोबार करने से छोटे व्यवसाय भी अच्छी बिक्री कर सकते हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे कठिन परिस्थितियों से जूझने का जज्बा भी जरूरी है। वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कोई काम छोटा नहीं होता, बस उसे करने का तरीका और मेहनत मायने रखती है।

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