नई दिल्ली: भारत दक्षिण चीन सागर में चीन को काउंटर करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका बड़ा संकेत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के वियतनाम दौरे से मिला है। डोभाल ने वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग से मुलाकात की, जो कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं। दोनों नेताओं के बीच उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक हुई। यह मुलाकात ऐसे वक्त पर हुई है जब भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।
रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा
बैठक में दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर जोर दिया। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही पुलिस सहयोग, अपराधियों की धरपकड़ और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करने पर सहमति बनी। भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति और महासागर विजन के तहत वियतनाम के साथ रिश्तों को दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक मजबूत कर रहा है। दोनों देश सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण में लगातार सहयोग कर रहे हैं।
ऐतिहासिक रूप से मजबूत हैं भारत-वियतनाम संबंध
भारत और वियतनाम के रिश्तों की जड़ें गहरी हैं। 1956 में दोनों देशों ने कांसुलर संबंध स्थापित किए थे और 7 जनवरी 1972 को औपचारिक राजनयिक संबंध शुरू हुए। आर्थिक मोर्चे पर भी साझेदारी मजबूत है। 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 16 बिलियन डॉलर रहा, जिसे 2030 तक 25 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सेमीकंडक्टर, फिनटेक और डिजिटल पेमेंट जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ रहा है।
ब्रह्मोस डील से बढ़ेगी बीजिंग की टेंशन
वियतनाम ने चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का सौदा किया है। इस करीब 5800 करोड़ रुपये की डील की पुष्टि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शांगरी-ला डायलॉग में की थी। हालांकि मिसाइलों की संख्या का खुलासा नहीं हुआ है। इससे पहले फिलीपींस को भी ब्रह्मोस की डिलीवरी हो चुकी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्रह्मोस को रोकना चीन के लिए बड़ी चुनौती है, ऐसे में वियतनाम की यह डील दक्षिण चीन सागर में शक्ति संतुलन बदल सकती है।












