नई दिल्लीः दीवाली बस आने ही वाली है और दिवाली का त्योहार परिवार के साथ मनाने का मौका हर किसी को नहीं मिल पाता है। पर इस दिवाली पर जो कैदी अपने परिवार से नहीं मिल पते है तो इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने राज्य की जेलों में सजा काट रहे 143 पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल देने की मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत सभी चयनित कैदियों को 6 नवंबर 2026 यानी धनतेरस के दिन जेल से रिहा किया जाएगा। वे पैरोल की अवधि के दौरान अपने परिवार के साथ रहकर दिवाली मना सकेंगे। सरकार का यह कदम कैदी कल्याण और जेल सुधार योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पात्र कैदियों को त्योहार के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देना है।
2003 से लागू है पैरोल की व्यवस्था
गुजरात में दिवाली के मौके पर पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल देने की व्यवस्था वर्ष 2003 से चली आ रही है। इस साल सरकार ने कुल 143 कैदियों को इसका लाभ देने का फैसला किया है। इनमें 60 वर्ष से अधिक उम्र के 103 पुरुष कैदी और 40 महिला कैदी शामिल हैं। इन सभी को निर्धारित नियमों के अनुसार पैरोल पर रिहा किया जाएगा। पैरोल मिलने का मतलब यह है कि कैदी तय समय के लिए जेल से बाहर रह सकते हैं, लेकिन उन्हें संबंधित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। पर ये हर एक को मौका नहीं मिलेगा बस कुछ कैदियों को ही मिल पाएगा। पुलिस महानिदेशक (जेल) डॉ. के.एल.एन. राव के मुताबिक, गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों को दिवाली पर पैरोल देने का प्रावधान नहीं है। जिन कैदियों की अपील हाई कोर्ट में लंबित है, एनआरआई कैदी और दूसरे राज्यों के निवासी कैदी भी इस सुविधा के पात्र नहीं हैं। इसके अलावा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, आतंकवाद रोकथाम अधिनियम (POTA) और आतंकवाद एवं विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (TADA) के तहत सजा काट रहे कैदियों को भी पैरोल नहीं दी जाएगी।
गंभीर और समाज विरोधी अपराध भी दायरे से बाहर
नियमों के मुताबिक उन कैदियों को भी पैरोल नहीं मिलेगी जो किसी भी आतंकवादी गतिविधियों या राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों में शामिल थे। जो एक से अधिक अपराधों में सजा पाए कैदी भी इस योजना से बाहर रखे गए हैं। इसके अलावा बलात्कार, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी और जबरन वसूली जैसे गंभीर या समाज विरोधी अपराधों में दोषी कैदियों को भी दिवाली पैरोल नहीं दी जाएगी। जिन कैदियों पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं, वे भी इसके पात्र नहीं होंगे। इस तरह तय नियमों और पात्रता के आधार पर गुजरात में इस साल केवल 143 कैदियों को 15 दिन की पैरोल का लाभ मिलेगा।












