नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म करने के लिए कतर में चल रही कूटनीतिक बातचीत में नया मोड़ आ गया है। ईरानी वार्ताकार रविवार को दोहा से वापस लौट गए हैं। हालांकि बातचीत से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लौटने की वजह बातचीत में कोई अड़चन नहीं है। अभी एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है और जल्द ही अगली बैठक भी हो सकती है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि बातचीत का आधार ईरान की तरफ से सितंबर में तैयार किया गया 7 चरणों वाला प्लान है। इस प्लान का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना है। ईरान अब इसे पहले तय समय से जल्दी लागू करने को तैयार है।
ईरान ने रखीं अपनी शर्तें
बघाई ने बताया कि उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी संदेशों के आदान-प्रदान के लिए दोहा में मौजूद थे। कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान का संदेश अमेरिका तक पहुंचाया जा रहा है। ईरान ने साफ कहा है कि बिना अमेरिकी नाकेबंदी हटाए, उसकी मांगों का सम्मान किए बिना और जायज जरूरतें पूरी किए बिना कोई अंतिम समझौता नहीं होगा। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित तरीके से खोलना मुमकिन नहीं है।
होर्मुज 7 दिन नहीं, 2 दिन में खोलने का दावा
शनिवार को अल जजीरा ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से बताया था कि अगर समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट 7 दिन की जगह सिर्फ 2 दिन में खोला जा सकता है। हालांकि ईरान के शुरुआती प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही खारिज कर चुके हैं।
मिडटर्म चुनाव के बाद बढ़ सकता है तनाव
यह बातचीत ऐसे वक्त हो रही है जब अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म चुनाव होने हैं। आशंका जताई जा रही है कि चुनाव के बाद जंग फिर तेज हो सकती है। जब ईरान के प्रवक्ता से चुनाव को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि चुनाव के बाद अमेरिका कोई नया देश बन जाएगा। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका चुनाव से पहले ईरान पर कोई नया हमला नहीं करेगा और बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन उन्होंने आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।












