180 की स्पीड पर चल रही ट्रेन फिर भी नहीं छलका एक बूंद पानी, वंदे भारत का वीडियो वायरल

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नई दिल्ली: आपने अक्सर देखा होगा ट्रेन में सफर के दौरान हल्के झटके से भी सीट पर रखा सामान हिलने लगता है, लेकिन सोचिए अगर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन में पानी से भरे तीन गिलास एक के ऊपर एक रखे हों और पानी की एक बूंद भी न छलके। ऐसा ही नजारा इन दिनों वंदे भारत ट्रेन में देखने को मिला है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में ट्रेन के कोच के अंदर का दृश्य दिख रहा है। नीचे दो गिलास पानी से भरे रखे हैं और उन्हीं पर तीसरा गिलास संतुलन बनाकर रखा गया है। तीनों गिलास किनारे तर पानी से भरे हैं। पास में ही एक मोबाइल फोन रखा है, जिसमें ट्रेन की स्पीड 180 किमी प्रति घंटा दिख रही है। हैरानी की बात यह है कि इतनी तेज रफ्तार के बावजूद न तो गिलास हिलते हैं और न ही पानी छलकता है।

रेल राज्य मंत्री ने शेयर किया वीडियो

इस वीडियो को खुद रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। उन्होंने बताया कि यह वीडियो रेल कोच फैक्ट्री में तैयार की गई नई वंदे भारत ट्रेन के ट्रायल के दौरान का है। हाल ही में इस ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया गया था, जिसमें इसकी स्थिरता और तकनीक को परखा जा रहा था।

यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत का ऐसा टेस्ट चर्चा में आया है। इससे पहले भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें 180 किमी की रफ्तार पर पानी से भरा एक गिलास बिना छलके रखा रहा था। इस बार टेस्ट को और मुश्किल बनाते हुए एक की जगह तीन गिलास एक-दूसरे के ऊपर रखे गए हैं।

क्यों किया जाता है ऐसा टेस्ट?

रेलवे के मुताबिक, तेज रफ्तार में ट्रेन कितनी स्थिर रहती है, यह जानना बेहद जरूरी है। ट्रायल के दौरान कोच में कंपन, झटके और सस्पेंशन सिस्टम का आकलन किया जाता है। गिलास वाला यह देसी जुगाड़ इसी स्थिरता को दिखाने का एक आसान तरीका है कि यात्रियों को कितना आरामदायक सफर मिलेगा।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भारतीय रेलवे और वंदे भारत की इंजीनियरिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स इसे ‘मेड इन इंडिया’ की कामयाबी बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि ट्रेन 180 पर दौड़ सकती है और गिलास भी नहीं हिलता, लेकिन असली परीक्षा तो ट्रेनों को समय पर चलाने में है।

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