मौत से मुकाबला कर 17 वीरों ने लिखी शौर्य की अमर गाथा, एनडीआरएफ ने शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली: जब जिंदगी पर आफत का पहाड़ टूटता है, जब प्रकृति का प्रचंड प्रहार सब कुछ तबाह करने पर आमादा होता है, तब अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए मोर्चे पर डट जाने वाले असली नायक ही होते हैं। ऐसे ही जांबाजों की वीरता, समर्पण और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने अपने 17 अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

एनडीआरएफ स्थापना दिवस के अवसर पर 30 अक्टूबर को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में शहीद स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा राज्य पुलिस बलों का योगदान अतुलनीय है। शहीदों का बलिदान राष्ट्र की स्मृतियों में सदैव जीवित रहेगा। इस अवसर पर शहीदों के परिजन भी मौजूद रहे।

आपदा में उम्मीद की किरण बनता है एनडीआरएफ

मुख्य अतिथि नित्यानंद राय ने एनडीआरएफ की कार्यशैली, विश्वसनीयता और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीमों के पहुंचते ही लोगों के भीतर उम्मीद और भरोसे का संचार होता है। भीषण चक्रवातों से लेकर कोरोना महामारी तक बल ने जिस साहस और तत्परता से राहत एवं बचाव कार्य किए हैं, वे सराहनीय हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री के आपदा जोखिम न्यूनीकरण संबंधी दस सूत्रीय एजेंडे का उल्लेख करते हुए आपदा पूर्व तैयारी मजबूत करने और समुदायों को आपदाओं से निपटने में सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य एक ऐसा राष्ट्र बनाना है, जो आपदाओं के सामने मजबूती से खड़ा रह सके।

शहीद परिवारों से मिले मंत्री और महानिदेशक

एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद ने अतिथियों का स्वागत किया और शहीद जवानों को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना एवं कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने बल की ओर से राष्ट्रसेवा, साहस और समर्पण की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य अतिथि और महानिदेशक ने शहीदों के परिजनों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। परिवारों की समस्याओं और जरूरतों के बारे में जानकारी लेकर उनके समाधान का भरोसा भी दिलाया।

समारोह में एनडीआरएफ, बाल भवन पब्लिक स्कूल और राजकीय सर्वोदय सहशिक्षा विद्यालय के बैंड दलों ने आकर्षक प्रस्तुतियां देकर वीर शहीदों को संगीतमय श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि, स्कूली बच्चे तथा एनडीआरएफ एवं अन्य सुरक्षा बलों के जवान उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान अब तक एनडीआरएफ के 17 जवान सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं।

संदेश साफ है वर्दी सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि इंसानियत की रक्षा का संकल्प है। इन 17 वीरों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और मानवता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा देती रहेगी।

 

Reported By: Pankaj Rai

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