नई दिल्ली: मासूम बच्चियों की सुरक्षा और उनके सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के लिए अदालत ने सख्त संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बच्ची के साथ यौन दरिंदगी करने और बाल यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री तैयार करने तथा रखने के मामले में दोषी श्याम बिहारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 1.43 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 30 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।
डिजिटल अपराध की जांच में खुला दरिंदगी का खौफनाक सच
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार इस मामले में 17 जून 2025 को आरोपी श्याम बिहारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। शुरुआती आरोप इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बाल यौन शोषण एवं उत्पीड़न से जुड़ी सामग्री एकत्र करने प्रसारित करने और प्रकाशित करने के थे। लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी अपराध की एक और गंभीर परत सामने आई। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने एक नाबालिग बच्ची के साथ गंभीर प्रकृति का यौन हमला भी किया था।
पीड़िता की सुरक्षा और सम्मान को दी गई प्राथमिकता
सीबीआई ने नाबालिग पीड़िता का पता लगाकर उसकी सुरक्षा गरिमा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील तरीके से जांच की। बच्ची को आवश्यक परामर्श सहायता उपलब्ध कराई गई। जांच के दौरान चिकित्सकीय विशेषज्ञों फॉरेंसिक विशेषज्ञों और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जुटाने सुरक्षित रखने और उनकी प्रामाणिकता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
चार्जशीट से अदालत के फैसले तक चला कानूनी शिकंजा
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 14 अगस्त 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद 16 अक्टूबर 2025 को विशेष अदालत ने आरोपी के विरुद्ध आरोप तय किए। मुकदमे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने श्याम बिहारी को पॉक्सो अधिनियम भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत विभिन्न गंभीर अपराधों का दोषी करार दिया। दोषी को नाबालिग के साथ गंभीर यौन हमला, दुष्कर्म, बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल तथा बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री अपने पास रखने जैसे अपराधों में सजा सुनाई गई है।
मासूमियत से खिलवाड़ करने वालों को कड़ा संदेश
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के यौन शोषण और उत्पीड़न से जुड़े अपराधों की जांच तथा अभियोजन उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। एजेंसी ने बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों और सम्मान को सर्वोच्च महत्व देने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
Reported By: Pankaj Rai











