मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर टूटेगा अमेरिका का कहर? रिपोर्ट में दावा, ट्रंप बना रहे बड़े हमले की योजना

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच संघर्ष और गंभीर हो सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव के नतीजों का ईरान को लेकर ट्रंप के फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियोस’ ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि अगर मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान होता है, तो ट्रंप ईरान के खिलाफ अधिक सख्त कदम उठा सकते हैं। रिपोर्ट में बड़े सैन्य हमले की संभावना भी जताई गई है। ट्रंप ने हालिया रेडियो इंटरव्यू और फ्लोरिडा की चुनावी रैलियों में ईरान को लेकर संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक और छोटा ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान चला सकता है। हालांकि, ईरान चाहे तो बातचीत के रास्ते भी आगे बढ़ सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की उम्मीद कम है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार होगा।

व्हाइट हाउस में सैन्य विकल्पों पर हुई चर्चा

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन व्हाइट हाउस पहुंचे थे। वहां उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने अरब खाड़ी देशों के नेताओं से संपर्क कर चुनावों के बाद सीमित अवधि के बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने को कहा है। हालांकि, इस योजना को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

युद्ध पर भारी खर्च, ट्रंप की लोकप्रियता पर भी असर

ईरान के साथ संघर्ष का असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। पेंटागन की ओर से कांग्रेस को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती साढ़े सात महीनों में अमेरिका 47 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। वहीं, ‘हार्टफोर्ड कैप्स-हैरिस’ के हालिया सर्वे में केवल 35 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने ईरान युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन किया है। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को घरेलू स्तर पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना बताया जाता है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा है, क्योंकि इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कई देशों तक तेल और व्यापारिक सामान पहुंचता है। ऐसे में ट्रंप का अगला फैसला अंतरराष्ट्रीय हालात पर बड़ा असर डाल सकता है।

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