ईरान की सेना ने रविवार को दावा किया कि उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। ईरानी सेना ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि यह पिछले कुछ महीनों में उसके द्वारा रोका गया 54वां अमेरिकी ड्रोन है। इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एमक्यू-9 रीपर ड्रोन गिराने का दावा किया था।
इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, ड्रोन को नष्ट किए जाने के ईरानी दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानबाजी ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा
फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में रिपब्लिकन पार्टी की एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक और सीमित सैन्य अभियान चला सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान बातचीत के जरिए समझौते का रास्ता चुन सकता है।
ट्रंप के बयान से स्पष्ट है कि उनका प्रशासन सैन्य दबाव बनाए रखते हुए तेहरान से समझौते की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि किसी नए हमले को रोकने के लिए ईरान को किन विशिष्ट शर्तों को स्वीकार करना होगा।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की चिंता
अमेरिकी प्रशासन की प्रमुख मांगों में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य और आर्थिक मोर्चों पर कमजोर किया है और अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करना चाहता है।
ये ट्रंप के अपने आकलन और राजनीतिक दावे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ेगी और किसी समझौते की संभावना कितनी है, इस पर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?
बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य का इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के कई देशों तक पहुंचने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
ईरान के ड्रोन गिराने के दावे ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और वायु रक्षा प्रणालियों की क्षमता को लेकर बहस तेज कर दी है।
अमेरिकी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
इसी बीच अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने ईरान से जुड़ी कथित साजिशों को लेकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो को आगाह किया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी नागरिकों और अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की आशंका के कारण सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
सऊदी अरब सहित पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में अमेरिकी राजनयिक कर्मचारियों की तैनाती में बदलाव किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इन कदमों का उद्देश्य संभावित खतरों के बीच कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।
आगे कूटनीति या टकराव?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम कर पाएंगे या दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव का खतरा बढ़ेगा। फिलहाल किसी नए हमले की निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में दोनों सरकारों के आधिकारिक बयान और क्षेत्र में होने वाली गतिविधियां स्थिति की दिशा तय करने में अहम होंगी।












