अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को आगाह किया है कि ईरान से जुड़े संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि पश्चिम एशिया और दूसरे क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों तथा सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने की कोशिशें बढ़ सकती हैं। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी विदेश विभाग क्षेत्र में अपने राजनयिक केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा का आकलन कर रहा है।
सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास से गैरजरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का कदम भी इसी सुरक्षा समीक्षा के संदर्भ में सामने आया है। चेतावनी को किसी निश्चित हमले की पुष्टि नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह खुफिया आकलन और क्षेत्रीय हालात के आधार पर जारी की गई सुरक्षा संबंधी चिंता है।
विदेश मंत्री को भेजे गए संदेश में गंभीर आशंका
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लेटन ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक ज्ञापन भेजा था। इस दस्तावेज को गैर-वर्गीकृत श्रेणी में रखा गया था, यानी इसकी जानकारी साझा करने पर गोपनीयता संबंधी वर्गीकरण लागू नहीं था।
ज्ञापन में पश्चिम एशिया में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कथित घातक साजिशों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। क्लेटन ने खुफिया जानकारी को साझा करने योग्य बनाने का प्रयास किया, ताकि विदेश विभाग के कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी स्थिति से अवगत कराया जा सके। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि विदेशों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा के हालात पर लगातार नजर रखी जाती है और नई सूचनाओं के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।
सऊदी अरब में हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का एक कारण हूती समूह के हमलों का खतरा भी बताया गया है। रिपोर्ट में सऊदी अधिकारियों के हवाले से हवाई अड्डों पर हुए हमलों और उनमें जानमाल के नुकसान का उल्लेख किया गया है।
दिए गए विवरण के अनुसार, 10 अक्टूबर को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 308 लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बीच अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में अपने कर्मचारियों की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरत रहा है। हमलों से जुड़े आंकड़ों और जिम्मेदारी संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा?
तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने इजरायली सेना के रेडियो से बातचीत में संभावना जताई कि सप्ताहांत तक ईरान पर हमला हो सकता है। उनसे जब इस सप्ताह के अंत में सैन्य कार्रवाई की आशंका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे इनकार नहीं किया।
बराक ने यह भी कहा कि ट्रंप समझौते के लिए तैयार हैं और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है। उनके अनुसार, समझौता नहीं हो पाने के लिए ईरान जिम्मेदार है। यह उनका आकलन है; इसे किसी सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।
ट्रंप के बयान से बढ़ी अटकलें
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ एक और सीमित सैन्य अभियान की संभावना का जिक्र किया। उनके बयान और खुफिया प्रमुख की चेतावनी के बाद क्षेत्र में आगे की कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि वाशिंगटन कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाएगा या सैन्य विकल्प पर विचार करेगा। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक बयानों और क्षेत्रीय घटनाक्रम से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।












