वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का बड़ा दांव, दिल्ली में 10 लाख लोगों को जुटाने की तैयारी

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दिल्ली में होने वाली इस रैली के लिए कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य केवल राजधानी में बड़ी भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर व्यापक जनसमर्थन प्रदर्शित करना भी है। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने विरोध अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के नेताओं को सक्रिय किया गया है।

प्रदेश इकाइयों के साथ बैठकों के माध्यम से लोगों की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। कांग्रेस इस आयोजन को विपक्षी गठबंधन की एकजुटता प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में भी देख रही है। हालांकि, दस लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य अभी पार्टी की योजना है, इसकी वास्तविक सफलता का आकलन रैली के बाद ही हो सकेगा।

मुख्य रैली से पहले होगी प्रतीकात्मक संसद की बैठक

कांग्रेस ने जनसभा से पहले 30 अक्टूबर को दिल्ली के अशोक होटल में प्रतीकात्मक संसद आयोजित करने की योजना बनाई है। इसमें विपक्षी गठबंधन के सांसदों को आमंत्रित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी है। कांग्रेस का उद्देश्य इस गतिविधि के माध्यम से चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपना विरोध दर्ज कराना और विपक्षी दलों को एक साझा मंच पर लाना है।

पार्टी ने इस विरोध अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पांच बड़ी रैलियों की शृंखला बनाने की योजना भी तैयार की है। रामलीला मैदान का कार्यक्रम इस अभियान की पहली प्रमुख सभा होगा।

राज्यों में भीड़ जुटाने के लिए तय किए गए लक्ष्य

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल राज्यों के नेताओं के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं। हरियाणा से एक लाख से डेढ़ लाख लोगों को दिल्ली लाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए 50 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य बताया गया है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय ने भरोसा जताया है कि उनकी पार्टी इकाई निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करेगी। इन राज्यों के अतिरिक्त पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी कार्यकर्ताओं को लामबंद करने की तैयारी है।

युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

रैली को व्यापक स्वरूप देने के लिए कांग्रेस ने अपने विभिन्न संगठनों को भी सक्रिय किया है। वेणुगोपाल ने कांग्रेस सेवा दल, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रमुखों के साथ बैठक की। इनमें वीबी श्रीनिवास, अलका लांबा, उदय भानु चिब और विनोद जाखड़ शामिल हुए। इन संगठनों से युवाओं और महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विपक्षी एकजुटता की भी होगी परीक्षा

कांग्रेस की इस पहल में विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। तृणमूल कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे दलों की राजनीतिक स्थिति के बीच गठबंधन की एकजुटता पर भी नजर रहेगी। कांग्रेस इस रैली के जरिए अपने अभियान को मजबूत करना चाहती है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी जुटाना उसके संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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