रैगिंग को मजाक बताकर नहीं टाली जा सकती जिम्मेदारी: डॉ. सोमा दास

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हापुड़: कॉलेज में नए विद्यार्थी का परिचय कराने के नाम पर उसे अपमानित करना, धमकाना या उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम करने के लिए मजबूर करना रैगिंग है, जिसे मनोरंजन या परंपरा का नाम देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। मोनाड विश्वविद्यालय, हापुड़ के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. सोमा दास ने अपने लेख में रैगिंग मुक्त भारत के निर्माण के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी को अहम बताया है।

विश्वविद्यालयों का दायित्व और रैगिंग रोकथाम के उपाय

डॉ. सोमा दास के अनुसार, विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल विद्यार्थियों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी सम्मान की भावना विकसित करना भी है। रैगिंग इस उद्देश्य के विपरीत है। इससे विद्यार्थियों में भय, तनाव और आत्मविश्वास की कमी पैदा हो सकती है, जिसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ता है।उन्होंने कहा कि रैगिंग की रोकथाम के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एंटी-रैगिंग नियमों का प्रभावी पालन होना चाहिए।

एंटी-रैगिंग समितियों और स्क्वॉड को सक्रिय रखने के साथ शिकायतों की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है। उनके मुताबिक जागरूकता कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और पोस्टर अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही मेंटरशिप व्यवस्था, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और सकारात्मक परिचय कार्यक्रम नए विद्यार्थियों को सहज वातावरण देने में मदद कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर भी सतर्कता जरूरी

डॉ. दास ने डिजिटल माध्यमों से होने वाली साइबर रैगिंग को भी गंभीर चुनौती बताया। सोशल मीडिया और मैसेजिंग समूहों के जरिए किसी विद्यार्थी को परेशान करने से रोकने के लिए डिजिटल शिष्टाचार और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि रैगिंग मुक्त परिसर बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन की नहीं है। शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आपसी सम्मान, समानता, अनुशासन और सहयोग की भावना से ही सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकता है। डॉ. सोमा दास ने जोर दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा माहौल विकसित होना चाहिए, जहां हर विद्यार्थी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। यही रैगिंग मुक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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