अरुणाचल बॉर्डर पर चीन से तनाव बरकरार, ITBP प्रमुख ने कई जगहों पर टकराव की पुष्टि की

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नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव को लेकर पहली बार आधिकारिक पुष्टि सामने आई है। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर जनरल शत्रुजीत कपूर ने कहा कि वहां दोनों पक्षों के बीच आमना-सामना अभी भी जारी है।

गुरुवार को अलवर में ITBP के जवानों, यानी हिमवीरों, को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि हाल ही में अरुणाचल में कई जगहों पर ऐसी स्थिति बनी, जो अब भी चल रही है। उन्होंने फोर्स की शौर्य कमांडो टीमों के काम की तारीफ की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब जुलाई से अरुणाचल में कई झड़पों की खबरें आ रही थीं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई जगह टकराव हुआ। यह भी खबर है कि सितंबर में BRICS समिट के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान भी टकराव जारी रहा।

कांग्रेस का सरकार पर निशाना

कपूर के बयान के बाद कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने X पर लिखा कि भारत 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की “बदनाम क्लीन चिट” की कीमत चुका रहा है। रमेश के मुताबिक, ITBP प्रमुख ने PLA के साथ हाल की झड़पों में फोर्स के प्रदर्शन की सराहना की, जबकि प्रधानमंत्री और उनके संगठन ने इस पर गहरी चुप्पी साध रखी है।

ड्रोन पर बड़ा फोकस

कपूर ने कहा कि ड्रोन तकनीक ने पारंपरिक युद्ध को काफी बदल दिया है। ITBP हर प्लाटून में एक ड्रोन यूनिट बनाने, खुद ड्रोन बनाने और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने की योजना बना रही है। उन्होंने जल्द एक अलग स्ट्राइक कोर बनने की उम्मीद भी जताई।

उन्होंने कहा कि चीन ने PLA में भारी निवेश कर पारंपरिक युद्ध क्षमता बढ़ाई है, लेकिन ड्रोन बदलते युद्धक्षेत्र में बराबरी ला सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चार साल में यूक्रेन जैसे छोटे देश ने रूस को जो नुकसान पहुंचाया, वह युद्ध के बदलते तरीके को दिखाता है। उन्होंने ईरान का भी जिक्र किया।

1,000 करोड़ और अंडरग्राउंड शेल्टर

कपूर के अनुसार, ITBP को 2030 तक ज्यादा फंड मिलने की उम्मीद है और ड्रोन व एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये अलग रखने की योजना है। आधुनिकीकरण में ऑल-टेरेन वाहन, ऑटोनॉमस ग्राउंड वाहन और क्विक रिएक्शन वाहन खरीदना शामिल है। फोर्स अपने गोला-बारूद के आधुनिकीकरण पर भी विचार कर रही है। ड्रोन खतरे को देखते हुए ITBP की कई फ्रंटियर यूनिट्स ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत बॉर्डर आउटपोस्ट पर अंडरग्राउंड शेल्टर बना लिए हैं। इसका मकसद LAC पर फोर्स की तैयारी मजबूत करना है।

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