अदालत ने 2017 का फैसला पलटा, टाउन एरिया कमेटी शाहपुर का 1975 में दायर मुकदमा खारिज, 1963 के बैनामे को माना वैध

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मुजफ्फरनगर: शाहपुर के ऐतिहासिक पैठ मैदान की जमीन को लेकर पिछले 51 वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई में आर्य परिवार को बड़ी जीत मिली है। अपर जिला जज एवं त्वरित न्यायालय कोर्ट संख्या-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने गुरुवार को सत्यबीर आर्य एवं अन्य की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के वर्ष 2017 के फैसले को निरस्त कर दिया। साथ ही टाउन एरिया कमेटी शाहपुर की ओर से वर्ष 1975 में दायर मूल वाद को भी खारिज कर दिया। अदालत ने विवादित जमीन के संबंध में वर्ष 1963 में किए गए बैनामे को वैध माना है।

1975 से शुरू हुआ 51 साल पुराना भूमि विवाद

शाहपुर के पैठ मैदान की जमीन को लेकर विवाद वर्ष 1975 में शुरू हुआ था। टाउन एरिया कमेटी शाहपुर ने जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए अदालत में मुकदमा दायर किया था। इसमें 19 अगस्त 1963 को मेहर इलाही खां और अता इलाही द्वारा इलमचंद आर्य आदि के पक्ष में किए गए बैनामे को निरस्त करने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की गई थी। तभी से दोनों पक्षों के बीच जमीन के मालिकाना हक को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी।

अपीलीय अदालत ने पलटा 2017 का फैसला

मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन, त्वरित न्यायालय मुजफ्फरनगर ने 30 नवंबर 2017 को फैसला सुनाया था। इस निर्णय से असंतुष्ट सत्यबीर आर्य एवं अन्य ने प्रथम सिविल अपील संख्या 100/2017 दाखिल कर फैसले को चुनौती दी थी। अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आर्य पक्ष की अपील मंजूर करते हुए निचली अदालत का फैसला और डिक्री निरस्त कर दी। विवादित जमीन में खसरा संख्या 877, नया नंबर 421 का रकबा चार बीघा 19 बिस्वा और खसरा संख्या 878, नया नंबर 420 का रकबा दो बीघा 10 बिस्वा शामिल है। कुल सात बीघा नौ बिस्वा जमीन को लेकर यह विवाद चल रहा था। अभिलेखों में संबंधित संपत्तियों के वर्तमान नंबर 175, 176 और 177 भी दर्ज हैं।

1963 के बैनामे को मिली कानूनी मान्यता

अदालत ने 19 अगस्त 1963 के बैनामे को वैध मानते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इसका पंजीकरण 20 नवंबर 1963 को हुआ था। बैनामा रजिस्ट्री बही की जिल्द संख्या 463, पृष्ठ 126 से 128 और पंजीकरण संख्या 2193 पर दर्ज है। अदालत ने फैसले की प्रति संबंधित सब-रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश भी दिए हैं। आर्य पक्ष की ओर से अधिवक्ता अवध बिहारी लाल गुप्ता और अमित गुप्ता ने पैरवी की। करीब पांच दशक से अधिक समय तक चले इस मुकदमे में अपीलीय अदालत के फैसले से सत्यबीर आर्य और अन्य को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

Reported By: Rohit

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