लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की निष्पक्षता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी मतदान और मतगणना से जुड़े दस्तावेजों का सुरक्षित रहना भी है। इसी सवाल पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। कर्नाटक विधानसभा चुनाव की एक सीट से संबंधित विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत ने मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी, लेकिन आयोग की ओर से पेश वकील ने बताया कि फुटेज फिलहाल उपलब्ध नहीं है और उसे तलाशने की कोशिश जारी है। इस जवाब पर न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने नाराजगी जताई। अदालत ने सवाल उठाया कि जिस चुनाव का संचालन आयोग ने खुद किया, उससे जुड़े रिकॉर्ड उसके पास सुरक्षित क्यों नहीं हैं।
रिकॉर्ड नहीं मिला तो अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने आयोग के वकील से जानना चाहा कि चुनावी प्रक्रिया की निगरानी और संचालन करने वाली संस्था अपने ही रिकॉर्ड के बारे में इस तरह की स्थिति कैसे बता सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव से जुड़ी सामग्री का संरक्षण महज औपचारिकता नहीं है, बल्कि विवाद की स्थिति में उसकी अहम भूमिका होती है। आयोग की तरफ से मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलने की जानकारी दिए जाने पर न्यायाधीशों ने कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने संकेत दिया कि रिकॉर्ड तलाशने की बात कह देना पर्याप्त नहीं है। आयोग को अगली सुनवाई तक अपने पास उपलब्ध संबंधित सामग्री अदालत के सामने रखनी होगी।
श्रृंगेरी सीट के नतीजे से जुड़ा है विवाद
यह मामला कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद पैदा हुए विवाद से संबंधित है। कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा ने श्रृंगेरी विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार जीवराज ने चुनाव परिणाम को हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती कराने का आदेश दिया। पुनर्गणना के बाद राजेगौड़ा के मतों की संख्या घट गई और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। इस फैसले से असहमत राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी।
विधायक बने रहने पर मिली थी अंतरिम राहत
मई में सुप्रीम कोर्ट ने राजेगौड़ा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि उनकी याचिका पर अंतिम फैसला आने तक वह विधायक बने रहेंगे। अब इस विवाद में मतगणना की मूल रिकॉर्डिंग अहम हो गई है, क्योंकि उपलब्ध सामग्री से चुनावी प्रक्रिया और दोबारा गिनती से जुड़े सवालों की जांच में मदद मिल सकती है। अदालत की ताजा टिप्पणी से साफ है कि वह रिकॉर्ड की उपलब्धता को हल्के में लेने के पक्ष में नहीं है।
अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि अगली तारीख पर उसके पास मौजूद सभी संबंधित रिकॉर्ड पेश किए जाएं। पीठ ने चेताया कि यदि आयोग जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं करा पाया, तो उसके खिलाफ फैसला सुनाने की स्थिति बन सकती है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है। अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि आयोग मतगणना से जुड़ी रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध दस्तावेज अदालत के सामने रख पाता है या नहीं। इस मामले का परिणाम न केवल संबंधित सीट के विवाद के लिए अहम होगा, बल्कि चुनावी रिकॉर्ड के संरक्षण और जवाबदेही पर भी व्यापक सवाल खड़े कर सकता है।












