नई दिल्ली: एक सीट का विवाद हाथापाई की नौबत और फिर मौत की खौफनाक खबर! राजधानी दिल्ली की मेट्रो में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट को लेकर शुरू हुआ कथित विवाद एक 48 वर्षीय यात्री की मौत के मामले तक पहुंच गया। इस घटना ने मेट्रो में यात्रियों के व्यवहार आपसी संयम और छोटी-सी बात पर बढ़ते विवादों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में दिल्ली मेट्रो पुलिस ने एक सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी और उनके अधिवक्ता बेटे को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है।
मेट्रो डीसीपी आनंद डाभी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय प्रताप सिंह (65) और सिद्धार्थ सिंह (36) के रूप में हुई है। संजय प्रताप सिंह वर्ष 1984 बैच के एजीएमयूटी कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-44 के निवासी हैं। वहीं सिद्धार्थ सिंह दिल्ली में वकालत करते हैं और अपने पिता के साथ इस मामले में सह-आरोपी हैं। वह नोएडा के सेक्टर-50 के निवासी बताए गए हैं।
मेट्रो के सफर में शुरू हुआ विवाद
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक घटना 8 अक्टूबर 2026 की है। उस दिन 48 वर्षीय पवन शर्मा अपनी करीब 65 वर्षीय मां दुर्गा देवी के साथ यमुना विहार की ओर जाने के लिए दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे थे। यात्रा के दौरान मां-बेटे वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित सीटों पर बैठे हुए थे। इसी बीच मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन पर संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह ट्रेन में सवार हुए।
आरोप है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित सीट पर बैठने को लेकर पवन शर्मा और दोनों आरोपियों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते सीट को लेकर हुई कहासुनी ने कथित तौर पर उग्र रूप ले लिया और मामला शारीरिक झड़प तक पहुंच गया। जिस सफर को सामान्य तरीके से पूरा होना था वही विवाद के कारण दर्दनाक घटना में बदल गया। हालांकि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ झड़प किस स्तर तक पहुंची और पवन शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर बिगड़ी तबीयत
दिल्ली मेट्रो पुलिस के मुताबिक 8 अक्टूबर को शाम करीब 5 बजकर 47 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर एक व्यक्ति के बेहोश होने की सूचना मिली। पुलिस को जानकारी मिली कि बेहोश व्यक्ति को उसकी मां के साथ लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने पवन शर्मा को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आया कि पवन शर्मा अपनी मां के साथ मेट्रो में यात्रा कर रहे थे और मंडी हाउस स्टेशन पर ट्रेन में सवार हुए दोनों आरोपियों के साथ सीट को लेकर उनका विवाद हुआ था। एक ओर परिवार के लिए यह सामान्य यात्रा थी तो दूसरी ओर कुछ ही समय में यह सफर असहनीय दुख में बदल गया। मां दुर्गा देवी के बयान ने पुलिस जांच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
मां के बयान पर दर्ज हुई प्राथमिकी जांच के बाद दोनों गिरफ्तार
पुलिस ने बताया कि मृतक की मां के बयान के आधार पर 9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट मेट्रो थाने में प्राथमिकी संख्या 07/2026 दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और धारा 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर संजय प्रताप सिंह और सिद्धार्थ सिंह की कथित भूमिका की पड़ताल की गई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के पश्चात दोनों आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जांच जारी मौत के पीछे की पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस
दिल्ली मेट्रो पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस घटना से जुड़े सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है, ताकि विवाद की वास्तविक परिस्थितियों और पवन शर्मा की मौत से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि सार्वजनिक परिवहन में मामूली विवाद को हिंसक रूप लेने से रोकने के लिए संयम और जिम्मेदार व्यवहार कितना जरूरी है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीटों का उद्देश्य जरूरतमंद यात्रियों को सुविधा देना है, न कि किसी विवाद का कारण बनना। कहते है एक सीट के विवाद ने छीन ली जिंदगी की खुशियां, मेट्रो में संयम रखें क्योंकि गुस्से का अंजाम किसी परिवार पर भारी पड़ सकता है!
Reported By: Pankaj Rai












