नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें प्रिय भोग और शक्तिशाली मंत्र

0
13

नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम और मजबूत संकल्प का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना करने से भक्तों को धैर्य और आत्मविश्वास मिलता है। साथ ही कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, प्रिय भोग और आरती के बारे में।

मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। उनका स्वरूप साधना और तप के महत्व को दर्शाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्विनी छवि के कारण उन्हें मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां की पूजा करने से मन में शांति आती है और व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा को मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत करने से भी जोड़ा जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग

धार्मिक परंपरा के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पूजा में मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। भोग चढ़ाते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांट सकते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें। माता को फूल, अक्षत, चंदन और रोली अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। मां के मंत्र का जाप करने के बाद आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र:

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा॥

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए॥

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने॥

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम॥

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी॥

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here