सुप्रीम कोर्ट राजपाल यादव को 2 करोड़ चुकाने की दी डेडलाइन, CJI बोले- 'आपका पैसा भी अता-पता लापता है'

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मुंबई: बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। राजपाल खुद कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने 1 करोड़ 15 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है और बाकी रकम की समयसीमा बताने को कहा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच कर रही है। कोर्ट ने 15 सितंबर को राजपाल को कम से कम 2 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट लाने का निर्देश दिया था, लेकिन 5 अक्टूबर को वह सिर्फ 50 लाख का ड्राफ्ट ला सके थे, जिस पर कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने की चेतावनी दी थी।

ताजा सुनवाई में राजपाल की तरफ से 1.15 करोड़ का ड्राफ्ट पेश किया गया और 13 अक्टूबर तक 85 लाख रुपये RTGS के जरिए जमा करने का भरोसा दिया गया। उनके वकील ने बताया कि राजपाल अपनी करीब 30 करोड़ की पुश्तैनी संपत्ति बेच रहे हैं, जिसके लिए 85 लाख एडवांस मिलना है। पितृ पक्ष के कारण भुगतान रुका हुआ है, जो नवरात्रि शुरू होने के बाद 13 अक्टूबर को हो जाएगा।

’16 सावन झेल के’ फिल्म बनाऊंगा

सुनवाई के दौरान कोर्ट का माहौल हल्का भी हुआ। राजपाल ने बेंच से कहा कि 16 साल पुराने इस केस से उनकी इज्जत और आर्थिक स्थिति दोनों पर असर पड़ा है। जिस फिल्म ‘अता-पता लापता’ को लेकर यह विवाद है, वह कभी थिएटर में रिलीज ही नहीं हो पाई और उन्हें इसमें 17 करोड़ का नुकसान हुआ। इस सीजेआई ने फिल्म के शीर्षक पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी फिल्म की तरह, आपका पैसा भी ‘अता पता लापता’ है।”

आगे चीफ जस्टिस ने उन्हें अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का मनोरंजन करने और अपनी छवि सुधारने की सलाह दी। जवाब में राजपाल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह अगली फिल्म ’16 सावन झेल के’ नाम से बनाएंगे, जिसे सुनकर कोर्ट में सभी मुस्कुरा उठे।

क्या है पूरा मामला?

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता-पता लापता’ के लिए दिल्ली की मुरली प्रोजेक्ट्स कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। कर्ज वापसी के 7 चेक बाउंस होने पर कंपनी ने कोर्ट का रुख किया। निचली अदालत और फिर 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए हर चेक बाउंस के लिए 1.35 करोड़ जुर्माना और 3 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को उन्हें अंतरिम राहत देते हुए 5 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। साथ ही जस्टिस बागची ने चेतावनी दी कि इसे सिर्फ 3 महीने की सजा न समझें, इसे बढ़ाकर 2 साल भी किया जा सकता है।

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