नई दिल्ली: फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और विवादित दावा किया है। ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के बजाय बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया। उन्होंने यह टिप्पणी मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए की। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि फ्रांस में जो स्थिति बनी हुई है, उसके पीछे उनका मानना है कि अनियंत्रित बड़े पैमाने पर प्रवासन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामला स्कूलों की समस्याओं का नहीं, बल्कि इस्लाम द्वारा फ्रांस पर कब्जा करने की कोशिश का है। ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में पोस्ट में कोई विस्तृत सबूत नहीं दिया।
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन
फ्रांस में सितंबर के मध्य से शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों तक फैल गया है। छात्रों की मुख्य मांग स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, पर्याप्त शिक्षक और पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की है। प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों में कर्मचारियों की कमी, बड़ी कक्षाओं और खराब बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे उठाए हैं।
6 अक्टूबर को प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। फ्रांस के अलग-अलग शहरों में 2.5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे। इनमें छात्र, शिक्षक और अभिभावक भी शामिल थे। कई जगह प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया।
ट्रंप लंबे समय से उठाते रहे हैं प्रवासन का मुद्दा
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी यूरोप की प्रवासन नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। वह लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सीमाओं पर सख्ती करने की अपील करते रहे हैं। फ्रांस के मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों पर उनकी टिप्पणी भी इसी राजनीतिक रुख के संदर्भ में देखी जा रही है। हालांकि, फ्रांस में छात्रों के आंदोलन की रिपोर्टिंग में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख कारण बताया गया है। फ्रांस में प्रदर्शन अभी भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरकार छात्रों की मांगों पर बातचीत का रास्ता तलाश रही है, जबकि प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार की मांग कर रहे हैं।












