हिसार: राष्ट्रीय वीर किसान मजदूर दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्य याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा के वैज्ञानिक संरक्षण एवं वैधानिक पुनर्स्थापन की मांग दोहराई। राकेश दलाल ने कहा कि 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में बताया था। इसके बाद उन्होंने एएसआई और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों को लगातार पत्र, स्मरण-पत्र एवं अभ्यावेदन देकर प्रतिमा के संबंध में वैज्ञानिक और विधिसम्मत निर्णय लेने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि बार-बार अभ्यावेदन देने के बावजूद अभी तक उनकी मूल मांग का समाधान नहीं हुआ है।
21 नवंबर को दीपोत्सव सत्याग्रह एवं महाआरती
राकेश दलाल ने घोषणा की कि 21 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश के खजुराहो में जावरी मंदिर कहां पर शांतिपूर्ण “दीपोत्सव सत्याग्रह एवं महाआरती” के माध्यम से देश-विदेश में इस विषय को लेकर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरा कार्यक्रम कानून एवं प्रशासनिक नियमों के दायरे में रहकर आयोजित किया जाएगा।
देश-विदेश में समर्थन मिलने का दावा
दलाल ने बताया कि इसके बाद उन्होंने जावरी मंदिर के विषय को देश और विदेश में भारतीय समुदाय, संत समाज तथा विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के सामने रखना शुरू किया। उनके अनुसार, इस अभियान को देशभर से बड़ी संख्या में साधु-संतों एवं धर्माचार्यों का समर्थन मिल रहा है। विदेशों में बसे प्रवासी भारतीय भी इस मांग के समर्थन में आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पीठ, पुरी के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के समक्ष भी यह विषय रखा गया है। दलाल के अनुसार, धार्मिक स्तर पर प्रतिमा की प्रतिष्ठा के पक्ष में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि नई प्रतिमा के निर्माण के लिए सामाजिक स्तर पर आर्थिक सहयोग की पेशकश की गई है।
अंतरराष्ट्रीय विरासत उदाहरण का दिया हवाला
राकेश दलाल ने इटली और ग्रीस के अंतरराष्ट्रीय विरासत संरक्षण के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में पार्थेनॉन से संबंधित एक प्राचीन शिलाखंड को इटली से ग्रीस लाकर एथेंस के एक्रोपोलिस संग्रहालय में उसके संबंधित प्राचीन शिल्प के साथ पुनर्मिलित किया गया।उन्होंने मांग की कि भारत में भी आधुनिक संरक्षण विज्ञान और भारतीय कानून के तहत जावरी मंदिर की खंडित प्रतिमा के संरक्षण एवं संभावित पुनर्स्थापन का विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया जाए।
“हम कानून हाथ में नहीं लेंगे”
“हमारे साथ संत समाज है, देश के नागरिक हैं और विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों का समर्थन भी मिल रहा है। इसके बावजूद हम कानून हाथ में नहीं लेंगे। हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, उसके बाद बार-बार एएसआई को अभ्यावेदन दिए और सरकार के समक्ष अपनी बात रखी। हमारी मांग केवल इतनी है कि एएसआई अब समयबद्ध, वैज्ञानिक और कारण युक्त निर्णय दे।”












