नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में एक बार फिर अमेरिकी सैन्य ताकत का जमावड़ा होने जा रहा है, और इसके पीछे की वजह है ईरान के साथ बढ़ता तनाव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ईरान पर हमले की योजना बना रहे हैं, और इसी कड़ी में पेंटागन ने अपना एक और विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर इस इलाके की ओर रवाना कर दिया है।
अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर USS थियोडोर रूजवेल्ट रविवार, यानी 27 सितंबर को कैलिफोर्निया के सैन डिएगो से रवाना हो चुका है। इसके साथ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 9 को भी तैनात किया गया है, जिसमें विमानवाहक पोत के अलावा लड़ाकू विमान और सुरक्षा देने वाले कई अन्य युद्धपोत शामिल हैं। अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार यह तैनाती लंबे समय तक जारी रह सकती है, और इस जहाज को मिडिल ईस्ट पहुंचने में नवंबर तक का वक्त लग सकता है।
हजारों सैनिकों की हो रही तैनाती
इसके अलावा USS मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप को भी इस क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है, जिसमें 2,000 से ज्यादा मरीन सैनिक शामिल होंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी तैनाती में कुल मिलाकर 7,000 से अधिक नौसैनिक और 2,000 मरीन सैनिक भेजे जा सकते हैं। यानी कुल मिलाकर अमेरिका पश्चिम एशिया में करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त सैन्यकर्मियों को तैनात करने की तैयारी में है, जिससे यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की जमीन तैयार कर रहा है।
क्या तीन एयरक्राफ्ट कैरियर एक साथ होंगे तैनात
फिलहाल पश्चिम एशिया में USS जॉर्ज H.W. बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में जब USS थियोडोर रूजवेल्ट वहां पहुंचेगा, तो कुछ समय के लिए इस क्षेत्र में एक साथ तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद रहेंगे। हालांकि इस तैनाती का एक मकसद यह भी हो सकता है कि यह पहले से तैनात USS जॉर्ज वॉशिंगटन की जगह ले ले। गौरतलब है कि यह एयरक्राफ्ट कैरियर आमतौर पर जापान में तैनात रहता है और अगस्त में ही पश्चिम एशिया पहुंचा था। इसी वजह से अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिका स्थायी रूप से अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, या फिर सिर्फ पुराने जहाजों की जगह नए जहाज भेजकर रोटेशन कर रहा है।












