सऊदी अरब पर हमला हुआ तो साथ आएगा पाकिस्तान! नए डिफेंस पैक्ट के तहत सैन्य ताकत देने का दावा

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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा बयान देकर सबका ध्यान खींचा है। पाकिस्तान ने नए रक्षा समझौते के तहत साफ कर दिया है कि अगर सऊदी अरब पर हमला होता है, तो वह अपनी पूरी सैन्य ताकत उसके बचाव में लगाने को तैयार है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के पास जो भी सैन्य संसाधन मौजूद हैं, वे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिल रही है।

ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने मंगलवार को रोम दौरे के दौरान यह बात कही। जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तानी सेना यमन में ईरानी ठिकानों पर हुए हवाई हमलों में शामिल रही है, तो उन्होंने इसकी न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि सऊदी अरब की रक्षा से जुड़े समझौते के तहत पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह नहीं बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से इस बारे में कोई मदद मांगी है या नहीं।

तीन देशों के बीच हुआ था बड़ा समझौता

आसिफ का यह बयान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए नए रक्षा समझौते के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बता दें कि तीनों देशों ने 7 अगस्त को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक है और किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।

हूती हमलों को लेकर जताई गहरी चिंता

आसिफ ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि हूतियों ने हाल ही में यमन के लाल सागर तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा जमा लिया है, जिससे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास उनकी मौजूदगी काफी बढ़ गई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर भी हमले किए हैं, साथ ही सऊदी टैंकरों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोकने की भी कोशिश की है। आसिफ ने हूतियों को सीधे हमलावर करार देते हुए कहा कि सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का भी दुश्मन है।

फिलहाल पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए इस रक्षा समझौते को लागू करने के लिए एक सचिवालय तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए इस गठबंधन का पूरा ढांचा और काम करने का तरीका तय होगा। कुछ अन्य देशों ने भी इस समझौते में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है, हालांकि फिलहाल इसके विस्तार की कोई योजना नहीं है। यह बयान तीनों देशों के सेना प्रमुखों की रियाद में हुई हालिया बैठक के कुछ दिन बाद सामने आया है, जिसमें हूती हमलों से निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई थी।

गौरतलब है कि सऊदी अरब को सैन्य समर्थन देने के साथ-साथ पाकिस्तान ईरान से बातचीत के दरवाजे भी खुले रखना चाहता है। वह क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिशों को फिर से शुरू करने के पक्ष में है। अप्रैल में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी भी की थी।

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