नई दिल्ली: सऊदी अरब को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। बता दें, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि सऊदी अरब ने अभी तक परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं छोड़ा है। यह जानकारी अमेरिकी संसद को सौंपी गई एक गोपनीय रिपोर्ट में दी गई है, जिसका खुलासा वॉशिंगटन ने खुद अपनी पोस्ट में किया है।
यह रिपोर्ट ऐसे वक्त पर आई है जब अमेरिका और सऊदी अरब के बीच अरबों डॉलर की नागरिक परमाणु डील होने जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा प्लांट लगाएंगी।
खुफिया रिपोर्ट के बाद क्या होगी डील?
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इससे दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होंगे और सऊदी अरब परमाणु टेक्नोलॉजी के लिए रूस और चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा। लेकिन इस खुफिया रिपोर्ट के बाद कई अमेरिकी सांसदों ने इस डील पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्हें डर है कि नागरिक कार्यक्रम के नाम पर सऊदी अरब परमाणु बम बनाने का रास्ता तैयार कर रहा है।
क्यों खतरनाक है ये डील?
इस डील की 5 सबसे बड़ी चिंताजनक बातें सामने आई हैं। पहली, समझौते में कहा गया है कि शुरुआत में यूरेनियम को सिर्फ 5% तक ही समृद्ध किया जाएगा, लेकिन बाद में समीक्षा के बाद इसे 20% तक बढ़ाने की छूट मिल सकती है। परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह एक बार 20% तक विकसित हो गया तो उसे 90% यानी हथियार बनाने लायक स्तर तक ले जाना बेहद आसान होता है।
दूसरी बड़ी खामी यह है कि इस डील में IAEA के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को अनिवार्य नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसी सऊदी के सभी परमाणु ठिकानों की अचानक जांच नहीं कर पाएगी।
विरोध मिलने पर लग सकती है डील पर रोक
तीसरा, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान खुद कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी भी पीछे नहीं रहेगा। ऐसे में इस डील से पूरे मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू होने का खतरा है। इसी को लेकर डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को चिट्ठी लिखी है। सांसदों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन सुरक्षा मानकों से समझौता कर रहा है और सऊदी की हर मांग मान रहा है। फिलहाल यह डील कांग्रेस में 90 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया में है। अगर विरोध करने वाले सांसदों को बहुमत मिल गया तो इस पूरी डील पर रोक भी लग सकती है।












