IIT-बॉम्बे में छात्रों के आगे झुका प्रशासन, डायरेक्टर ने प्रोफेसर पर एक्शन समेत 18 प्वाइंट चार्टर पर किया हस्ताक्षर

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IIT Bombay
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नई दिल्ली: आईआईटी-बॉम्बे में पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों और प्रशासन के बीच का टकराव रविवार देर रात एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया। लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों की 18 मांगों को आखिरकार प्रशासन ने मान लिया है और अब इन पर आगे काम करने की सहमति भी जता दी है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने मुख्य गेट के पास तीन दिनों से धरने पर बैठे छात्रों से लंबी बातचीत के बाद इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर किए।

बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम 18 सितंबर को 20 साल के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के बाद शुरू हुआ था। इस घटना के बाद छात्र लगातार प्रशासन से जवाबदेही तय करने और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे, जिसके चलते कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ था।

प्रोफेसर पर कार्रवाई की उठी मांग

छात्रों की सबसे अहम मांगों में से एक प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ कार्रवाई करने की थी, जो साहिल की मौत से पहले हुई उनकी परीक्षा में पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद थे। जब बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया गया, तो निदेशक शिरीष केदारे ने भरोसा दिलाया कि संस्थान तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेगा। हालांकि संस्थान के एक अन्य अधिकारी ने यह भी साफ किया कि चार्टर पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं कि हर मांग पर तुरंत फैसला लिया जाएगा।

तीन घंटे तक चली बैठक

देर रात हुए इस समझौते से पहले प्रदर्शनकारी छात्रों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब तीन घंटे तक गहन बातचीत हुई थी। इस प्रस्ताव में साहिल की मौत की जांच के साथ-साथ संस्थान की शैक्षणिक, अनुशासनात्मक और छात्र कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की मांगें भी शामिल हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें निदेशक के इस्तीफे की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या-क्या शामिल हैं मांगों में

छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों में सबसे प्रमुख है साहिल वाकोडे की मौत की स्वतंत्र जांच कराना। छात्रों ने मांग की है कि जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तक और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक जारी की जाए। इसके अलावा निदेशक, डीन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एक खुली बैठक बुलाने की भी मांग रखी गई है।

इन मांगों में सिर्फ जांच ही नहीं, बल्कि संस्थान की पूरी व्यवस्था में सुधार की बातें भी शामिल हैं। छात्रों ने प्रोफेसरों के लिए एक स्पष्ट आचार संहिता बनाने, शिक्षकों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को समझने की ट्रेनिंग देने और व्यक्तिगत काउंसलिंग सुविधा को बेहतर बनाने की मांग की है। साथ ही अनुशासन समिति की प्रक्रिया में बदलाव और बड़े फैसलों में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही गई है।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर

छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने और उन्हें रोकने के लिए एक विशेष टीम बनाने की भी मांग रखी है, जिसमें छात्र, शिक्षक और बाहरी विशेषज्ञ शामिल हों। इसके अलावा संस्थान के अस्पताल में 24 घंटे मनोचिकित्सक की सुविधा देने की मांग भी की गई है। छात्रों ने 26 सितंबर तक इन सभी सुधारों की लिखित योजना मांगी है और साथ ही यह भी कहा है कि अगर एक महीने के भीतर ये बदलाव लागू नहीं हुए, तो निदेशक को इस्तीफा देना चाहिए।

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