नई दिल्ली: राजधानी में दिल्ली परिवहन निगम की बसों को चलाने वाले ड्राइवरों की हड़ताल की वजह से शहर के कई इलाकों में बस सेवाएं लगभग ठप पड़ गई हैं। यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सुबह से लेकर शाम तक बसें समय पर नहीं आ रही हैं। ज्यादा तनख्वाह, अच्छी मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर ड्राइवर सड़कों पर उतर आए हैं। कई डिपो से बसें निकली ही नहीं और जो निकलीं भी वे बीच रास्ते में रोक दी गईं। इससे आम लोगों का आना-जाना पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
डिपो पर रुकी बसें और यात्रियों की परेशानी
बुराड़ी, नांगलोई, रेवला खानपुर, जीटीके, नेहरू प्लेस और शादिपुर जैसे बड़े डिपो में बड़ी संख्या में बसें खड़ी दिखीं। ड्राइवर वहां इकट्ठा होकर अपना विरोध जता रहे थे। कुछ जगहों पर चालू बसों को भी बीच सड़क पर रोक दिया गया और यात्रियों से उतरने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि लोग मेट्रो, ऑटो या ऐप वाली कैब का सहारा लेने को मजबूर हो गए। छात्र, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्योंकि डीटीसी की बसें उनके रोजमर्रा के सफर का मुख्य जरिया हैं। बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों पर लंबी कतारें लग गईं और भीड़भाड़ से लोग परेशान दिखे।
ड्राइवरों की असली शिकायतें
ये ड्राइवर निजी कंपनियों के जरिए अनुबंध पर काम करते हैं। उनका कहना है कि सालों की मेहनत के बावजूद तनख्वाह बहुत कम मिलती है। मेडिकल बीमा, सवेतन छुट्टी या सालाना बोनस जैसी सुविधाएं भी नहीं दी जातीं। यूनियन के अनुसार दस-पंद्रह साल का अनुभव रखने वाले ड्राइवरों के साथ भी वैसा ही व्यवहार होता है जैसे अकुशल मजदूरों के साथ। स्थायी ड्राइवरों को ज्यादा वेतन मिलता है जबकि अनुबंध वाले ड्राइवरों को बीमार होने पर भी काम पर आने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे यात्रियों की सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है।
हड़ताल जारी रहने की आशंका
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने साफ कह दिया है कि हड़ताल बुधवार तक चलेगी। अगर तनख्वाह, मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की मांगें पूरी हो जाएं तो बातचीत के लिए तैयार हैं। दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में शहरवासियों को आने वाले दिनों में भी आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ सकती है।











