नई दिल्ली: ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज भले ही ढल चुका हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के ‘कभी न खत्म होने वाले सीजन’ का अंत फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। एक के बाद एक लगातार खेली जा रही सीरीज़ और टूर्नामेंट्स ने खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक क्षमता को चरम सीमा पर पहुंचा दिया है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘लिटिल मास्टर’ सुनील गावस्कर ने खिलाड़ियों पर बढ़ रहे इस अत्यधिक दबाव को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) से अपील की है कि आगामी क्रिकेट कैलेंडर को तैयार करते समय खिलाड़ियों के वर्कलोड और उनकी शारीरिक सीमाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
घरेलू क्रिकेट की मजबूती से ही बनेंगे वर्ल्ड बीटर
सुनील गावस्कर के अनुसार, भारतीय क्रिकेट का भविष्य मजबूत घरेलू ढांचे पर निर्भर है। एशियाई खेलों में मिला स्वर्ण पदक टीम के लिए सकारात्मक कदम है और इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है। हालांकि, लंबे समय तक विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार करने के लिए प्रथम श्रेणी और घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देना जरूरी है।
अगर अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल के दबाव में घरेलू टूर्नामेंट्स की अनदेखी हुई, तो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पाइपलाइन कमजोर पड़ सकती है। अब ICC और BCCI की रणनीति पर नजर रहेगी।
टीम इंडिया ही पूरा भारतीय क्रिकेट नहीं
खिलाड़ियों की थकान के अलावा गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे की सोच पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पूरा ध्यान सिर्फ राष्ट्रीय टीम पर केंद्रित होकर रह गया है, जबकि सच्चाई यह है कि ‘इंडियन क्रिकेट टीम ही इंडियन क्रिकेट नहीं है, बल्कि वह तो भारतीय क्रिकेट तंत्र की एक उपज मात्र है।’
गावस्कर ने तीन अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय टीमें तैयार करने के दावों पर भी तंज कसा। उनका कहना है कि कागज़ों पर तीन टीमें बनाना आसान है, लेकिन हकीकत यह है कि हाल के सालों में मुख्य टीम भी उम्मीद के मुताबिक बड़ी ट्रॉफियां जीतने में संघर्ष करती दिखी है।
गन्ने और मशीन का रूपक
‘स्पोर्टस्टार’ में लिखे अपने हालिया कॉलम में सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेटरों के अत्यधिक व्यस्त शेड्यूल पर तीखा प्रहार किया है। खिलाड़ियों की स्थिति पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उन्होंने लिखा कि भारतीय क्रिकेटर न तो कोई मशीन हैं और न ही गन्ना, जिन्हें रस की आखिरी बूंद निकल जाने तक लगातार निचोड़ा जाता रहे। उनका मानना है कि पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय दिए बिना खिलाड़ियों को लगातार मैदान पर उतारना उनके प्रदर्शन और फिटनेस दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
गावस्कर का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब खुद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया भी खिलाड़ियों में बढ़ती चोटों की मुख्य वजह अत्यधिक मैचों को मान चुके हैं। 2027 से शुरू होने वाले ICC के अगले चार साल के फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम (FTP) पर जल्द ही चर्चा होनी है, ऐसे में गावस्कर चाहते हैं कि इस बार कैलेंडर बनाते वक्त राजस्व के साथ-साथ खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जाए।












