नई दिल्ली: 14 सितंबर, सोमवार से दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होने जा रही है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाला यह पावन पर्व अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा के विसर्जन के साथ संपन्न होता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में मंगलमूर्ति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित करने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। प्रतिमा की मुद्रा, सूंड की दिशा, रंग और स्थापना का स्थान आपके जीवन में सुख-समृद्धि तय करता है।
किस दिशा में होनी चाहिए गणेश जी की सूंड
वास्तु और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की स्थापना अत्यंत शुभ मानी गई है।
बाजार से प्रतिमा लाते समय सबसे अधिक ध्यान गणेश जी की सूंड पर दिया जाता है। वाममुखी प्रतिमा में चंद्र तत्व का प्रभाव होता है और इनकी पूजा-अर्चना के नियम काफी सरल व सौम्य होते हैं।
कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति
घर के लिए हमेशा बैठी हुई मुद्रा वाली गणेश जी की मूर्ति चुननी चाहिए। इनकी पूजा से घर में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर, दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को दक्षिणामुखी कहा जाता है, जो सूर्य तत्व से प्रभावित होते हैं। इन्हें सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है।
दक्षिणामुखी गणपति की पूजा के नियम बेहद कठोर और अनुशासित होते हैं, जिनमें जरा सी भी लापरवाही का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण इन्हें मंदिरों में तो स्थापित किया जाता है, लेकिन सामान्यतः घरों में इनकी स्थापना से बचा जाता है।
प्रतिमा का स्वरूप, रंग और अन्य महत्वपूर्ण प्रतीक
घर के लिए हमेशा बैठी हुई मुद्रा वाली गणेश जी की मूर्ति चुननी चाहिए। विराजमान मुद्रा जीवन में स्थिरता, शांति और ठहराव का प्रतीक होती है। प्रतिमा का चेहरा शांत, सौम्य और प्रसन्न मुद्रा में होना चाहिए। चार भुजाओं वाले गणेश जी, जिनके हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा हो, उनका यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। मूर्ति के रंग की बात करें तो सिंदूरी, सफेद, हल्का पीला, क्रीम और हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। अत्यंत गहरे या असामान्य रंगों के बजाय इन पारंपरिक रंगों की प्रतिमा को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा, प्रतिमा लेते समय यह सुनिश्चित करें कि उनके साथ उनका वाहन मूषक और हाथ में प्रिय भोग मोदक अवश्य अंकित हो।
स्थापना की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते समय उनका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा पूजा स्थल के लिए सबसे पवित्र और उत्तम मानी जाती है। ध्यान रहे कि मूर्ति कहीं से भी टूटी या खंडित न हो। आज के समय में आस्था के साथ-साथ प्रकृति का ध्यान रखना भी आवश्यक है, इसलिए मिट्टी या प्राकृतिक रंगों से बनी पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति का चयन करना सबसे उत्तम फैसला होता है।












