'हमारा देश किसी के प्रभाव में नहीं', ब्राजील में ट्रंप के विरोधी लूला डा सिल्वा ने जीता चुनाव, चौथी बार संभालेंगे राष्ट्रपति की कुर्सी

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नई दिल्ली: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने दूसरे दौर के मुकाबले में दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ लूला ब्राजील में चौथी बार राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे समय में जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है, लूला की जीत को वाम-मध्य विचारधारा के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।

ब्राजील के चुनावी न्यायालय ने 100 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद लूला की जीत की आधिकारिक घोषणा की। 80 वर्षीय लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से पीछे छोड़ दिया। यह अंतर इतना बड़ा रहा कि उनकी जीत को चुनौती देना आसान नहीं होगा। हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद बोल्सोनारो की ओर से कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

लूला का चौथा कार्यकाल क्यों है अहम?

लूला की यह जीत केवल ब्राजील की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका पर पड़ सकता है। इस क्षेत्र के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों, ब्राजील और मैक्सिको में अब वाम-मध्य विचारधारा वाले नेता सत्ता में हैं। इससे क्षेत्रीय राजनीति में इस विचारधारा की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसकी सालाना जीडीपी करीब 2.6 ट्रिलियन डॉलर बताई जाती है। ऐसे में देश की आर्थिक नीतियों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ के दबाव के बीच ब्राजील के सामने अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता घटाने और स्वतंत्र नीतियां अपनाने का अवसर है।

‘ब्राजील किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं’

चुनाव में जीत के बाद लूला डा सिल्वा ने स्पष्ट संदेश दिया कि ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव में रहकर काम नहीं करेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के साथ व्यापार और आर्थिक संबंध कई देशों के लिए अहम मुद्दा बने हुए हैं। लूला ने अपने देश की स्वतंत्र पहचान और फैसले लेने के अधिकार पर जोर दिया।

उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने की जरूरत पर भी बात की। लूला के मुताबिक, डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेशी हस्तक्षेप की कोशिशों को नाकाम किया गया है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को देखते हुए इनके लिए उचित नियम बनाना जरूरी है।

शासन के तरीके में बदलाव का वादा

लूला ने जीत के बाद देश चलाने के तरीके में बदलाव करने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद अब कोई चुनावी प्रतिद्वंद्वी नहीं है और सरकार का ध्यान देश को आगे बढ़ाने पर रहेगा। उन्होंने फैसले लेने की प्रक्रिया में जनता को अधिक शामिल करने की बात कही। अब उनके सामने चुनावी वादों को पूरा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच ब्राजील के हितों की रक्षा करने की चुनौती होगी। उनका चौथा कार्यकाल देश की घरेलू राजनीति के साथ-साथ अमेरिका और लैटिन अमेरिका के अन्य देशों के साथ संबंधों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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