भारत के जेहन में सबसे गहरा जख्म, 26 तारीख और खौफ का इतिहास,आखिर क्यों इस तारीख से कांपती है दुनिया?

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26th Date Disasters
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नई दिल्ली: भोटेकोशी नदी का पानी जब 26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा पर फटे एक ग्लेशियर के साथ नीचे की बस्तियों की तरफ बढ़ा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों में 900 से ज्यादा लोगों की जिंदगी इस पानी में बह जाएगी। साढ़े चार हजार से अधिक लोग अब तक लापता हैं और तलाशी अभियान अब भी जारी है। लेकिन इस हादसे ने एक पुरानी, अनकही बहस को फिर हवा दे दी है। भारत के जेहन में सबसे गहरा जख्म 26 नवंबर 2008 का है, जब मुंबई पर हुए आतंकी हमले में ताज होटल, सीएसएमटी और नरीमन हाउस खून से रंग गए और 166 बेगुनाहों की जान चली गई। आखिर महीने की 26 तारीख का पन्ना पलटते ही दुनिया में इतनी बड़ी-बड़ी त्रासदियां क्यों दर्ज होती रही हैं?

हादसों की वो फेहरिस्त जो भुलाए नहीं भूलती

26 अप्रैल 1986 को यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में हुआ धमाका आज भी दुनिया की सबसे भयावह परमाणु दुर्घटना गिना जाता है, जिसका रेडिएशन असर पीढ़ियों तक महसूस हुआ। इसी तारीख को, लेकिन 1942 में, चीन के बेंक्सीहू में कोयला खदान में गैस विस्फोट से 1,549 मजदूर मारे गए थे। 
यह आज तक का सबसे भीषण खदान हादसा माना जाता है। आसमान में भी यह तारीख मेहरबान नहीं रही। 26 मई 1991 को लाउडा एयर की एक फ्लाइट हवा में टूटकर बिखर गई और सवार सभी 223 यात्री मारे गए। 

तारीख 26 का खौफनाक रहस्य 

भारत के जेहन में सबसे गहरा जख्म 26 नवंबर 2008 का है, जब मुंबई पर हुए आतंकी हमले में ताज होटल, सीएसएमटी और नरीमन हाउस खून से रंग गए और 166 बेगुनाहों की जान चली गई। ईरान के बाम शहर में 2003 में आए भूकंप ने इकतीस हज़ार लोगों को लील लिया था।
वहीं 1939 में तुर्की में इसी तारीख को आए भूकंप ने बत्तीस हज़ार से ज़्यादा जानें छीनी थीं। जावा और हिंदुकुश के भूकंप भी इसी सूची में दर्ज हैं। विज्ञान इसे संयोग कहता है, ज्योतिष इसे ग्रहों का खेल, लेकिन जब भी कैलेंडर पर 26 लिखा दिखता है, लोगों के मन में एक अनजाना डर जरूर सिर उठा लेता है।

सितारों की चाल में छिपा हिसाब-किताब

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय इसे केवल संयोग मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि तारीख से ज्यादा उस वक्त बनने वाली ग्रह-दशाएं और ग्रहणकाल मायने रखते हैं। उनके हिसाब से गुजरात भूकंप से महज सत्रह दिन पहले सूर्यग्रहण लगा था, जब मकर राशि में सूर्य, बुध और केतु एक साथ विराजमान थे। सुनामी वाली रात पूर्णिमा थी और सूर्य-राहु-केतु की युति को अशुभ बताया जाता है, जबकि मुंबई की बाढ़ के समय कर्क राशि में सूर्य और शनि एक साथ मौजूद थे। इसी तरह 2006 के जावा भूकंप में मंगल-शनि की स्थिति और 1986 के चेर्नोबिल हादसे में शनि-केतु के प्रभाव का जिक्र भी वे करते हैं। अंकशास्त्र की भाषा में 26 का जोड़ (2+6) आठ बनता है, और आठ अंक को न्यायप्रिय मगर कठोर ग्रह शनि से जोड़ा जाता है। 

इतिहास उठाकर देखें तो यह महज इत्तेफाक कहना मुश्किल हो जाता है। 26 दिसंबर 2004 की सुबह हिंद महासागर के तल में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया था, और उसके बाद उठी सुनामी की लहरों ने सुमात्रा से लेकर चौदह देशों के तटीय इलाकों को निगल लिया। मरने वालों की गिनती सवा दो लाख के पार चली गई थी। ठीक इससे तीन साल पहले, 26 जनवरी 2001 को जिस वक्त पूरा भारत गणतंत्र दिवस की परेड में मशगूल था, गुजरात के कच्छ में धरती 7.7 तीव्रता से डोली और करीब बीस हजार लोग मलबे में दफन हो गए। फिर 26 जुलाई 2005 आया, जब मुंबई पर बादल इस कदर फटे कि महज एक दिन में 944 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। शहर की रफ्तार थम गई और 1,094 जानें चली गईं।

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