क्या ईरान मानेगा अमेरिका की शर्तें? 15 पॉइंट डील पर बढ़ी हलचल

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब कूटनीति एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रों वाला एक बड़ा शांति प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि इस प्रस्ताव की सख्त शर्तों को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या तेहरान इसे स्वीकार करेगा या नहीं. अमेरिका चाहता है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम एक महीने का युद्धविराम भी लागू किया जाए, ताकि हालात को शांत किया जा सके.

अमेरिका द्वारा दिए गए इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी पाबंदी लगाने की बात कही गई है. इसके साथ ही तेहरान से यह भी मांग की गई है कि वह क्षेत्र में सक्रिय अपने सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी) को समर्थन देना बंद करे. सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी शामिल है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है.बदले में क्या देगा अमेरिका?

इस योजना के तहत अमेरिका ने कुछ राहत देने के संकेत भी दिए हैं. इसमें आंशिक आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में सीमित नागरिक परमाणु कार्यक्रम की अनुमति और ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सहयोग जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. हालांकि, इसके बदले ईरान को अपने मिसाइल कार्यक्रम और उससे जुड़े सैन्य ढांचे को भी खत्म करना होगा.

इजरायल और सैन्य तैयारी का पहलू

इस प्रस्ताव से इजरायल के अधिकारी हैरान बताए जा रहे हैं, क्योंकि वे अभी भी युद्ध जारी रखने के पक्ष में हैं. इस बीच, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर रहा है. पहले से तैनात हजारों सैनिकों के अलावा अतिरिक्त बल भेजने की तैयारी चल रही है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता और संभावित वार्ता

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की पेशकश भी की है. अमेरिका ने इस पहल में शामिल होने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में वार्ता शुरू हो सकती है. हालांकि, अभी तक ईरान को इसमें शामिल करने की कोशिश जारी है.

नया नहीं है यह प्रस्ताव

राजनयिकों का मानना है कि यह 15 सूत्रीय योजना पूरी तरह नई नहीं है. इससे पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव 2025 में परमाणु वार्ता के दौरान सामने आया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया था. उस समय भी ईरान पर सख्त शर्तें रखी गई थीं, जिनमें उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर नियंत्रण शामिल था.

दावे और इनकार के बीच उलझी स्थिति

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि हाल ही में बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन ईरान ने ऐसे किसी भी दावे को खारिज कर दिया है. तेहरान का कहना है कि कोई गुप्त वार्ता नहीं चल रही है और केवल सीमित स्तर पर संपर्क बना हुआ है. ईरान ने अमेरिका पर यह आरोप भी लगाया है कि वह हमलों में देरी कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों को शांत करने की कोशिश कर रहा है.

आगे का रास्ता कितना कठिन?

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा है. अमेरिका की बदलती शर्तें और ईरान के भीतर निर्णय लेने को लेकर असमंजस भी बातचीत को मुश्किल बना सकते हैं. हालांकि, कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि यह प्रस्ताव वास्तव में शांति की ओर ले जाएगा या तनाव को और बढ़ा देगा.

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