कर्ज से इलाज, कर्ज से एयर एम्बुलेंस… लाखो उधार लेकर बचाने गए संजय, रांची क्रैश ने उजाड़ दिए कई परिवार

0
9
Treatment with debt, air ambulance with debt... Sanjay borrowed lakhs to save lives, Ranchi crash devastated many families
Treatment with debt, air ambulance with debt... Sanjay borrowed lakhs to save lives, Ranchi crash devastated many families

रांची: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस के क्रैश होने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की सामूहिक त्रासदी है जिन्होंने बेहतर इलाज और सपनों के लिए भारी कर्ज उठाया था. दुर्गम जंगल में बिखरे मलबे के नीचे दबी जिंदगियां उन कर्जों और उम्मीदों की गवाही दे रही हैं जो कभी पूरा होने वाले थे.

23 फरवरी 2026 की शाम रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरने के महज 23 मिनट बाद खराब मौसम और संभावित तकनीकी समस्या के कारण विमान का एटीसी से संपर्क टूट गया. विमान करम टॉड़ के पास गिरा, जहां राहत दल को चार किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचना पड़ा. सभी सात लोग मौके पर ही मारे गए. यह घटना ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और महंगे इलाज की मजबूरी को उजागर कर रही है.

डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता: कर्ज पर टिका सपना

इस हादसे में जान गंवाने वाले डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में तैनात थे. उनके पिता बजरंगी प्रसाद बिहार के औरंगाबाद जिले के एक साधारण परिवार से हैं. टूटी आवाज में वे बताते हैं कि हमने अपनी सारी जमीन बेच दी थी. कर्ज लिया बस एक ही सपना था मेरा बेटा डॉक्टर बनेगा. डॉ. विकास ने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस पूरी की. पढ़ाई के दौरान फीस, हॉस्टल और किताबों के लिए बार-बार पैसे जुटाने पड़े. पिता ने कहा कि लोग कहते थे इतना कर्ज मत लो, कैसे चुकाओगे? लेकिन मैंने कहा, बेटा पढ़ जाएगा तो सब चुका देगा. डॉ. विकास का सात साल का बेटा है.

मरीज संजय कुमार: होटल की आग से शुरू हुई त्रासदी

विमान में सवार गंभीर मरीज संजय कुमार चंदवा कस्बे में छोटा-सा होटल चलाते थे. पिछले सप्ताह होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिसमें संजय बुरी तरह झुलस गए. उन्हें पहले रांची के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया. इलाज महंगा था, हर दिन हजारों रुपये खर्च हो रहे थे. परिवार की सारी बचत खत्म हो गई. रिश्तेदारों से मदद मांगी गई. डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर किया. सड़क मार्ग जोखिम भरा था, इसलिए एयर एम्बुलेंस ही विकल्प बचा.

साढ़े सात से आठ लाख का कर्ज

एयर एम्बुलेंस बुक करने के लिए 7.5 से 8 लाख रुपये लगे. परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से था. संजय के भाई अजय, जो हरियाणा सरकार में कार्यरत हैं, बताते हैं कि हमने रिश्तेदारों से कर्ज लिया. कुछ लोगों ने भरोसे पर पैसे दिए. कुछ ने ब्याज पर. हमें लगा जान बच जाएगी तो सब चुका देंगे. मरीज को विमान में बैठाया गया. पत्नी अर्चना देवी, रिश्तेदार और मेडिकल टीम साथ थी. अन्य सदस्य घर लौट आए, उम्मीद थी दिल्ली पहुंचते ही इलाज शुरू होगा. लेकिन घर पहुंचते ही खबर मिली कि विमान क्रैश हो गया.

17 वर्षीय ध्रुव कुमार: मामा की सेवा में दिल्ली की तैयारी छोड़ी

सिमडेगा का रहने वाला 17 वर्षीय ध्रुव कुमार रांची में पढ़ाई कर रहा था. मोबाइल इंजीनियरिंग में करियर बनाने का सपना था. दिल्ली जाने की तैयारी चल रही थी. जब मामा संजय झुलसे, तो ध्रुव ने पढ़ाई रोक दी और उनकी सेवा में लग गया. डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर किया तो वह भी साथ चल पड़ा. वह परिवार का अकेला बेटा था.

उड़ान के बाद बदला मौसम और टूटा संपर्क

विमान शाम करीब 7:11 बजे रांची से उड़ा. कुछ देर बाद मौसम खराब हुआ. तेज हवाएं और कम विजिबिलिटी के कारण रूट डायवर्ट करने की कोशिश में 7:34 बजे एटीसी से संपर्क टूट गया. विमान सिमरिया के घने जंगलों में करम टॉड़ के पास क्रैश हो गया. हादसा इतना भीषण था कि कोई बच नहीं पाया.

राहत कार्य की चुनौतियां

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एसएसबी 35वीं बटालियन और राहत दल सक्रिय हुए. विमान सड़क से चार किलोमीटर अंदर दुर्गम जंगल में गिरा था. जवानों को पैदल चलकर मलबे तक पहुंचना पड़ा. शवों को कंधों पर उठाकर निकाला गया और चतरा अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here