भारत जैसा मुख्य चुनाव आयुक्त दुनिया के कितने बड़े लोकतंत्रों में मिलता है जानिए

0
7

भारत में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद इन दिनों विशेष गहमागहमी के बीच चर्चा में है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं और उनके कामकाज तथा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा है। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर अंतरिम आदेश देने से इनकार किया, लेकिन चुनाव आयोग और केंद्र से जवाब मांगा है। इसी बहस के बीच यह समझना दिलचस्प है कि भारत जैसा चुनावी ढांचा दुनिया के दूसरे बड़े लोकतंत्रों में कितना मिलता है।

दरअसल, हर देश ने चुनाव कराने के लिए अलग संस्थागत मॉडल बनाया है। कहीं स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग है, कहीं न्यायपालिका की भूमिका अहम है और कुछ देशों में चुनावी जिम्मेदारी केंद्र, राज्य तथा स्थानीय प्रशासन के बीच बांटी गई है। इसलिए ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ जैसा पद हर लोकतंत्र में मौजूद होना जरूरी नहीं है।

अमेरिका में चुनाव की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत

अमेरिका में भारत की तरह पूरे देश के चुनावों का संचालन करने वाला एक राष्ट्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं है। वहां चुनावों का प्रशासन मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय निकायों के स्तर पर होता है। अलग-अलग राज्यों में चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां अलग अधिकारियों के पास हो सकती हैं। संघीय चुनाव आयोग यानी Federal Election Commission मुख्य रूप से चुनावी वित्त और राजनीतिक अभियान से जुड़े नियमों की निगरानी करता है। इसलिए अमेरिकी व्यवस्था में किसी एक व्यक्ति को पूरे देश का चुनाव प्रमुख कहना सही नहीं होगा।

ब्रिटेन में आयोग और स्थानीय अधिकारी अलग भूमिका निभाते

यूनाइटेड किंगडम में Electoral Commission चुनावी नियमों, राजनीतिक दलों और चुनावी वित्त से जुड़े मामलों की निगरानी करता है। लेकिन मतदान का संचालन स्थानीय स्तर के अधिकारियों के जरिए होता है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में Returning Officer की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस वजह से ब्रिटेन में भारत के CEC जैसा एकल राष्ट्रीय चुनाव प्रमुख नहीं है।

जर्मनी में Federal Returning Officer का मॉडल

जर्मनी में संघीय चुनावों के लिए Federal Returning Officer यानी Bundeswahlleiter का पद मौजूद है। यह अधिकारी चुनावों की तैयारी, प्रशासनिक समन्वय और संघीय स्तर की चुनावी प्रक्रिया में अहम जिम्मेदारी निभाता है। हालांकि राज्यों और स्थानीय स्तर पर भी अलग चुनावी अधिकारी काम करते हैं। इसलिए जर्मन मॉडल भारत के केंद्रीय चुनाव आयोग से अलग है।

फ्रांस में प्रशासन और संवैधानिक परिषद की भूमिका

फ्रांस में चुनावों का प्रशासन मुख्य रूप से गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से होता है। वहीं संवैधानिक परिषद राष्ट्रपति चुनाव और जनमत-संग्रह सहित कुछ महत्वपूर्ण चुनावी मामलों की निगरानी तथा विवादों के निपटारे में भूमिका निभाती है। यहां भारत जैसा स्वतंत्र राष्ट्रीय चुनाव आयोग और CEC का ढांचा नहीं है।

जापान में स्थानीय चुनाव आयोग महत्वपूर्ण

जापान की चुनावी व्यवस्था में स्थानीय Election Management Committees की अहम भूमिका होती है। मतदान और चुनावी प्रशासन का बड़ा हिस्सा इन्हीं संस्थाओं के जरिए संचालित होता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव संबंधी प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन भारत की तरह पूरे चुनाव तंत्र के शीर्ष पर एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद नहीं है।

ब्राजील में चुनाव और न्यायपालिका का अनोखा मेल

ब्राजील का मॉडल बाकी देशों से काफी अलग है। वहां Superior Electoral Court यानी सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट चुनावी व्यवस्था का केंद्रीय संस्थान है। यह चुनाव प्रशासन के साथ-साथ चुनावी विवादों और नियमों से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी अध्यक्षता न्यायपालिका से जुड़े व्यक्ति द्वारा की जाती है, इसलिए इसे भारत के CEC का सीधा समानांतर नहीं माना जा सकता।

इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका में स्वतंत्र आयोग

इंडोनेशिया में General Elections Commission यानी KPU चुनाव कराने वाली प्रमुख राष्ट्रीय संस्था है। इसमें कई सदस्य होते हैं और एक अध्यक्ष आयोग का नेतृत्व करता है। दक्षिण अफ्रीका में Independent Electoral Commission स्वतंत्र रूप से चुनावों का संचालन करती है और उसका अध्यक्ष संस्था के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दोनों देशों में भारत की तरह स्वतंत्र राष्ट्रीय चुनावी संस्था का मॉडल दिखाई देता है, लेकिन संवैधानिक अधिकार और पदों की संरचना अलग हैं।

ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यवस्था

ऑस्ट्रेलिया में Australian Electoral Commission संघीय चुनावों का संचालन करती है। इसके भीतर अध्यक्ष और Electoral Commissioner जैसे पद होते हैं। साथ ही राज्यों और क्षेत्रों के अपने चुनावी निकाय भी काम करते हैं। इसलिए वहां चुनावी प्रशासन एक व्यक्ति के बजाय संस्थागत ढांचे के जरिए चलता है।

भारत में CEC की भूमिका क्यों अलग है

भारत का निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का प्रशासन करता है। आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें CEC के रूप में पद संभाला था। मौजूदा विवाद ने यह सवाल जरूर तेज किया है कि इतने बड़े चुनावी तंत्र में निर्णय प्रक्रिया कितनी सामूहिक होनी चाहिए। लेकिन दुनिया के उदाहरण बताते हैं कि लोकतंत्रों ने चुनाव प्रबंधन के लिए एक जैसा मॉडल नहीं अपनाया है। कहीं एक स्वतंत्र आयोग केंद्र में है, कहीं न्यायपालिका जुड़ी है और कहीं स्थानीय संस्थाएं चुनावों का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। यही अंतर भारत की CEC व्यवस्था को वैश्विक तुलना में समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बनाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here