नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने अपने हालिया बयान में एक बड़ा दावा करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे उनके लंबे अनशन को राहुल गांधी के हाथों समाप्त कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें इग्नोर किया. वांगचुक का कहना है कि इस घटना के बाद उन्हें न केवल कांग्रेस बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के रवैये से भी निराशा हुई. सोनम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने उनके अनशन खत्म करने की योजना पर ध्यान ही नहीं दिया.
सोनम वांगचुक ने एक बातचीत के दौरान बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि ने राहुल गांधी तक संदेश पहुंचाने और उनसे अनशन तुड़वाने का अनुरोध करने की कई बार कोशिश की. उनकी इच्छा थी कि राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचकर उन्हें जूस पिलाएं और 26 दिनों से जारी भूख हड़ताल का समापन कराएं. हालांकि, उन्हें इस संबंध में कोई स्पष्ट या सकारात्मक जवाब नहीं मिला. वांगचुक ने कहा कि उनकी उम्मीद थी कि विपक्ष का कोई प्रमुख नेता इस आंदोलन के प्रति समर्थन दिखाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें राजनीतिक नेतृत्व के प्रति निराश किया.
केंद्रीय मंत्रियों पर भी लगाए वादा तोड़ने के आरोप
राहुल गांधी के अलावा सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पर भी वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. उनके अनुसार दोनों नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि उनके साथ हुई मुलाकात और सूप पिलाने से जुड़ी तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक वे स्वयं विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अनशन समाप्त होने की घोषणा नहीं कर देते. लेकिन बाद में ये तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं. वांगचुक ने कहा कि इस घटना के बाद उनका इन नेताओं पर विश्वास कमजोर हो गया.
राजनीतिक दलों के रवैये पर जताई नाराजगी
सोनम वांगचुक ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेता या तो पहुंचे ही नहीं या फिर काफी देर से आए. उनका मानना है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पत्नी गीतांजलि ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. वांगचुक के अनुसार, इससे पहले उन्होंने भाजपा और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं, लेकिन उस समय ऐसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली.
नेतृत्व से जताई निराशा
वांगचुक ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के समर्थकों को आलोचना को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए. उनका मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों के लिए जगह होनी चाहिए और नेताओं को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर व्यापक समर्थन हासिल करना था.











